RSS प्रमुख मोहन भागवत पहुंचे लखनऊ, लखीमपुर के कबीरधाम में आज करेंगे सत्संग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवतआज लखनऊ पहुंचे हैं। उनकी यह यात्रा धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से काफी अहम मानी जा रही है। मोहन भागवत आज लखीमपुर खीरी जिले के गोला स्थित मुस्तफाबाद के कबीरधाम आश्रम में आयोजित विशेष सत्संग कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और RSS कार्यकर्ताओं की तैयारियां जोरों पर हैं।
दोपहर 12 बजे सत्संग
आयोजकों के अनुसार मोहन भागवत दोपहर 12 बजे आश्रम में होने वाले सत्संग में भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में कबीरधाम के संत, श्रद्धालु और बड़ी संख्या में संघ के स्वयंसेवक मौजूद रहेंगे।
सत्संग में धर्म, समाज, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना जैसे विषयों पर मोहन भागवत का उद्बोधन होने की संभावना है।

ड्रोन कैमरों से निगरानी भी की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।
कबीरधाम आश्रम, संत कबीर की विचारधारा पर आधारित एक आध्यात्मिक स्थल है। यहां समरसता, संतुलन और सामाजिक समर्पण के मूल मंत्रों का प्रचार-प्रसार किया जाता है। RSS भी इन मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहा है, इसलिए मोहन भागवत का यहां आना दोनों विचारधाराओं के बीच की सांस्कृतिक संगति को दर्शाता है।

क्या संदेश दे सकते हैं मोहन भागवत
- संघ प्रमुख के संबोधन को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि वे:
- सामाजिक समरसता पर बल देंगे
- राष्ट्र निर्माण में संतों की भूमिका का उल्लेख करेंगे
- युवाओं को नैतिक जीवन और सेवा की ओर प्रेरित करेंगे
- संस्कृति, परंपरा और आधुनिक भारत में सामंजस्य की बात करेंगे
मोहन भागवत को देखने और सुनने के लिए स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में भारी उत्साह है। आश्रम और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं।
“संघ प्रमुख का आगमन हमारे लिए गौरव की बात है। उनका संदेश सुनना सौभाग्य होगा,” — एक स्थानीय श्रद्धालु ने कहा।
RSS इन दिनों उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता को लेकर विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। मोहन भागवत का यह दौरा न सिर्फ धार्मिक पहलू बल्कि सामाजिक जुड़ाव और विस्तार की दृष्टि से भी देखा जा रहा है।
इस कार्यक्रम की जानकारी को मीडिया चैनल, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर लाइव किया जा रहा है। आश्रम प्रशासन ने विशेष स्क्रीन की व्यवस्था भी की है, जिससे दूर बैठे श्रद्धालु भी सत्संग देख सकें।
विचारकों का मानना है कि मोहन भागवत का कबीरधाम आना यह दर्शाता है कि संघ धार्मिक-सांस्कृतिक संतुलन को एक नए आयाम में ले जाने की दिशा में प्रयास कर रहा है।
“कबीर की विचारधारा और संघ के संस्कारों का समागम देश की आत्मा को मजबूती देता है,” — एक सामाजिक चिंतक ने कहा।
RSS प्रमुख मोहन भागवत का यह कार्यक्रम केवल एक सत्संग नहीं, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक चेतना के मेल का प्रतीक है। आने वाले समय में इस प्रकार की यात्राएं और कार्यक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन और राष्ट्रीय एकता को नया बल प्रदान कर सकते हैं।



