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CM विष्णुदेव साय ने वीर सावरकर को उनकी जयंती पर किया नमन

सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि वीर सावरकर जी की त्याग, साहस और संकल्प शक्ति से जुड़ी गाथाएं आज भी हम सबको प्रेरित करती हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महान स्वतंत्रता सैनानी वीर सावरकर जयंती पर उन्हें नमन किया है। सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि वीर सावरकर जी की त्याग, साहस और संकल्प शक्ति से जुड़ी गाथाएं आज भी हम सबको प्रेरित करती हैं। महान देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर जी को आज उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक छोटा सा वीडियो अपने तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा किया है। इस वीडियों में उन्होंने सावरकर से जुडी स्मृतियों की झलक पेश करने का प्रयास किया है। सीएम साय ने इस वीडियों के माध्यम से विनायक दामोदर सावरकर नमन किया है।

ज्ञात हो कि महान स्वतंत्रता सैनानी विनायक दामोदर सावरकर एक प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। 28 मई 1883 को नासिक के भगूर गांव में जन्मे विनायक दामोदर सावरकर को वीर सावरकर के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि सबसे पहले पूर्ण स्वतंत्रता को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का लक्ष्य घोषित किया था,तब राष्ट्रध्वज तिरंगे के बीच में धर्मचक्र लगाने का सुझाव भी वीर सावरकर ने ही दिया था, जिसे राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने माना था।

वीर सावरकर जी की त्याग, साहस और संकल्प शक्ति से जुड़ी गाथाएं आज भी हम सबको प्रेरित करती हैं।

महान देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर जी को आज उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन। pic.twitter.com/HHxkzhNuh0

— Vishnu Deo Sai (Modi Ka Parivar) (@vishnudsai) May 28, 2024 ” data-loaded=”true”>

वीर सावरकर जी की त्याग, साहस और संकल्प शक्ति से जुड़ी गाथाएं आज भी हम सबको प्रेरित करती हैं।

महान देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर जी को आज उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन। pic.twitter.com/HHxkzhNuh0

— Vishnu Deo Sai (Modi Ka Parivar) (@vishnudsai) May 28, 2024

वीर सावरकर प्रथम राजनीतिक बंदी थे, जिन्हें फ्रांस भूमि पर बंदी बनाने के कारण हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में प्रकरण पहुंचा और बंदी जीवन समाप्त होते ही उन्होंने अस्पृश्यता आदि कुरीतियों के विरुद्ध आंदोलन आरंभ किया। वह पहले ऐसे भारतीय राजनेता थे जिन्होंने सबसे पहले विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। और ऐसे पूर्व स्नातक, जिनकी स्नातक की उपाधि को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने की वजह से अंग्रेज सरकार ने वापस ले लिया। महान क्रांतिकारी वीर सावरकर का निधन 26 फरवरी 1966 को मुंबई में हुआ था।

 

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