24 वर्ष बाद पुरातन छात्र प्रेम राज रस्तोगी की माता के नाम पर सावित्री देवी रस्तोगी खगोल विज्ञान विभाग के बरांडे का निर्माण प्रारंभ किया गया
गुजरात के सौजन्य से विद्यालय में 24 वर्षों के उपरांत एक 172 फुट लम्बे बरांडे का शुभारंभ उनकी माता स्वर्गीय सावित्री देवी रस्तोगी के नाम पर उनके बड़े भाई एवं विद्यालय के पुरातन छात्र सुभाष रस्तोगी एवं प्रबंधक पवन कुमार रस्तोगी के द्वारा पिलर खड़ा कर कर किया गया

मवाना( संवादाता आरके विश्वकर्मा)। ए एस इंटर कॉलेज मवाना के पुरातन छात्र प्रेम राज रस्तोगी मैनेजिंग डायरेक्टर केवायबी कोन्मेट प्राइवेट लिमिटेड वडोदरा, गुजरात के सौजन्य से विद्यालय में 24 वर्षों के उपरांत एक 172 फुट लम्बे बरांडे का शुभारंभ उनकी माता स्वर्गीय सावित्री देवी रस्तोगी के नाम पर उनके बड़े भाई एवं विद्यालय के पुरातन छात्र सुभाष रस्तोगी एवं प्रबंधक पवन कुमार रस्तोगी के द्वारा पिलर खड़ा कर कर किया गया ,इस बरांडे का शुभारंभ छात्रों के द्वारा कराया गया क्योंकि यह बरान्डा अंग्रेजी मध्य के उन कक्षा के आगे बनाया जा रहा है जिसका शिलान्यास भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू के द्वारा किया गया था विद्यालय में खगोल विज्ञान की मान्यता प्राप्त की गई है इस कारण इस बरान्डे का नाम सावित्री देवी रस्तोगी खगोल विज्ञान विभाग रखा जाएगा प्रधानाचार्य डॉक्टर मेघराज सिंह ने बताया पिछले दो वर्षों में पुरातन छात्र-छात्राओं के द्वारा किए गए प्रयास से विद्यालय निरंतर प्रगति कर रहा है उसका परिणाम मवाना क्षेत्र के सामने है इस बरांडे के निर्माण से 10 कक्षों के छात्र-छात्राओं को भीष्म गर्मी से राहत मिलेगी तथा प्रथम तल पर 10 कक्ष का निर्माण किया जा सकेगा प्रेम राज रस्तोगी मैनेजिंग डायरेक्टर के द्वारा इस विद्यालय के 100 वर्ष पूर्ण होने पर शताब्दी समारोह के शुभ अवसर पर वर्ष 2014 में मां सरस्वती की मूर्ति की स्थापना कराई गई थी प्रेमराज रस्तोगी के द्वारा किए गए इस उत्कृष्ट एवं पुनित कार्य से अन्य पुरातन छात्र-छात्राओं को प्रेरणा मिलेगी पिछले 2 वर्ष में इस विद्यालय में अनेकों कार्य विद्यालय के पुरातन छात्राओं द्वारा कराए गए हैं बिना पुरातन छात्र-छात्राओं के विद्यालय में विकास कार्य करना असंभव है, क्योंकि पुरातन छात्र छात्राओं को अपने विद्यालय के अपने छोटे बहन भाइयों की सुविधा हेतु अपने द्वारा अर्जित किए गए धन में से कुछ हिस्सा विद्यालय को दान करने से एक बहुत बड़ा सुकून एवं उन्नति प्राप्त होती है और बिना पुरातन छात्र-छात्राओं के इस विद्यालय का विकास संभव नहीं है


