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हजरत अली अकबर अलैहिस्सलाम की शहादत की याद मंे निकाला मातमी जुलूस


सहारनपुर। (6 मोहर्रम 1445 हिजरी) हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के 18 साल के बेटे हजरत अली अकबर अलैहिस्सलाम जो शबीह-ए-पैगम्बर थे उन्हीं की याद मे 6 मोहर्रम का मातमी जुलूस परम्परागत तरीके से नगर के मुख्य बाजारो में निकाला गया। मौहल्ला अन्सारियान स्थित वक्फ जनाना इमामबाड़ा हाजी सादिक हुसैन से अकीदत मंदों ने जुलजना निकाला, छोटा इमामबाड़ा अन्सारियान से बड़ा अलम निकाला गया। जुलूस मंे अकीदत मंदांे ने भारी तादाद मंे जंजीरांे मे बंघी छुरियो व हाथ से अपने शरीर पर मातम किया। हज़रत अली अकबर अलैहिस्सलाम का गम सोगवारो के दिलो दिमाग पर छाया हुआ था। जिन लोगों ने छुरियों से मातम किया था उनके शरीर से खून रिस रहा था। सभी गमजदा लोगांे ने काले कपडे़ पहन रखे थे तथा नंगे पैर,गरेबान चाक, सीनाजनी/मातम करते हुए चल रहे थे। सभी अकीदत मंद लब्बैक या हुसैन, या हुसैन, या अली, या अब्बास, हाय सकीना हाय प्यास की आवाजे़ बुलंद कर चल रहे थे। मातमी जुलूस छोटी इमाम बारगाह से शुरू होकर मौहल्ला मुत्रीबान, नखासा बाजार, खानी बाग, फारूख की मस्जिद सर्राफा बाजार पुराना बजाजा, हलवाई हट्टा, बाजार दीनानाथ, बड़तला यादगार, भगत सिह चैक, मोरगंज, नगर कोतवाली के सामने से होता हुआ पुल दाल मण्डी, मटिया महल, आर्य कन्या इण्टर काॅलेज से होता हुआ मौहल्ला जाफर नवाज स्थित बड़ा इमामबाड़ा जाफर नवाज पहंुचा, वहां कुछ समय रूकने के बाद जुलूस की वापिस पुल सब्जी मण्डी, जामा मस्जिद कला, नया बाजार, गौरी शंकर बाजार, चूड़ी बाजार, मौहल्ला संगियान, चैक मौहल्ला अन्सारियान से होता हुआ छोटा इमाम बाड़ा अन्सारियान पहुंच कर सम्पन्न हुआ। मातमी जुलूस में सबसे आगे ऊंट, दर्जनो घोड़े, बैल व झोठा गाड़ियां, आदि पर बैठे छोटे-छोटे बच्चे काले कपड़े पहने नाराये रिसालत या रसूउल्लाह, हाय सकीना हाय प्यास, चमन चमन कली कली अली अली अली अली, नारा-ए-तकबीर अल्लाहू अकबर, हुसैनियत ज़िदाबाद यजीदयत मुर्दाबाद आदि के नारे लगा रहे थे। बच्चांे के हाथे में काले निशान थे,उनके पीछे शबीह अलम हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम को लेकर अली रजा चल रहे थे। बड़े अलम के पीछे मातमी अन्जुमनों में अन्जुमने अकबरिया, अन्जुमने इमामिया व अन्जुमने सोगवारे अकबरिया चल रही थी। अन्जुमने इमामिया में नौहा पढ़ने वालों में मिर्जा मेहरबान पंजेतन, आसिफ रजा, तौसिक मैहदी, मिर्जा अयाज, अली मैहदी, शहबाज काजमी, शौजब रजा आदि रहेः-
करबला करबला ए करबला पाइन्दाबाद।
हम रहे या ना रहे बाकी रहे तेरी याद।
गुलशने इस्लाम मे रंग भर गया खूने हुसैन।
सुरखुरू दीने नबी को कर गया खूने हुसैन।
अब कभी सर को उठा न पायेगे अहले फसाद।
अन्जुमन इमाममिया का संचालन मिर्जा मेहरबान, लियाकत हुसैन अनवार जैदी, जमाल जैदी, आदि ने किया। सोगवारे अन्जुमने अकबरिया मंे नौहा पढ़ने वालांे में सलीस हैदर काजमी, अनवर अब्बास जैदी, अदनान काज़मी, शुजा काज़मी, रहबर जैदी, शबीह हैदर आदि थेः-
हुसैनियत की ये पहचान देखो।
अलम देखो अलम की शान देखो।
अजादारी से आले अमबीया है।
हदीसो को पढ़ो कुरआन देखो।
अलम ऊंचा है दुनिया में हमारा।
हमारी फतेह का ऐलान देखो।
सोगवारे अन्जुमन अकबरिया का संचालन में अख्तर अली जैदी, इफतेखार हुसैन जैदी, विजारत काजमी, ख्वाजा नगीन, आसिफ हैदर, कब्बू, नवाजिश हुसैन, महमूद नकवी, वाजिद अली, शाह अफरोज, राहत अली, मौ0 आलम, आगाज अतहर, शाने रजा आदि ने किया।
अन्जुमने अकबरिया मे नौहा पढ़ने वालों में गुडडू, रियाज आब्दी, मिर्जा नदीम, समीर आब्दी, कमाल जैदी, सुहैल आदि थेः-
जब रिदा सर से छीनी मैं सदा देती रही तू ना आया गाजी।
एहले इमरान कहां और ज़िन्दान कहां
ये बहन कैद हुई, तू ना आया गाजी,
हमको पानी ना मिला, तेरी खुशबू तो रही,
तेरे बाजू ना कटे, चाहे मशकीजा छीदे,
ये मगर हो ना सका, तेरे बाजू है जुदा,
मुझ पे है तशना लबी, तू ना आया गाजी,
अन्जुमने अकबरिया का संचालन शादाब आब्दी, निशान हैदर आब्दी, दानिश आब्दी रविश आब्दी, मानू आब्दी, मौहम्मद आब्दी, अजमत आब्दी, रिहान आब्दी, मुनव्वर आब्दी, दानिश जैदी आदि ने किया।
जुलूस मंे सबसे पीछे जुलजना (हजरत इमाम हुसैन के घोड़ा जुलजना की शबीह) चल रही थी जिसकी बाघ (लगाम) खुवाजा अब्बास कुमैल, कैसर अब्बास, मुनीर अब्बास, आदि ने पकड़ रखी थी। जुलूस का संचालन छोटा इमामबाड़ा अन्सारियान के प्रबन्धक दानिश आब्दी ने किया। जुलूस में फरहत मैहदी, चांद जैदी, डा0 जैड ए कौसर, एड0 मन्जर हुसैन काजमी, इन्तेजार मैहदी, रईस हैदर काजमी, काजी अकरम,प्यारे मियां, सकलैन रजा, फरहत हुसैन, साजिद काजमी, जैगम अब्बास, ख्वाजा रईस अब्बास, ज़िया अब्बास, रियाज हैदर, मिर्जा अहसान, अजहर काजमी, मेहताब अली, रियासत हवारी, आसिफ हवारी, फिरोज हैदर, जमीर काजमी, सिबतैन रजा, कौसर अब्बास, समीर हैदर, नदीम जैदी, फराज जैदी, अली जैब काजमी, बाकर रजा काजमी, तहसीन काजमी, मुन्तजिर मैहदी, किशवर मैहदी, इशरत हुसैन, अबुतालिब,डाॅ. एम एम जैदी,अरशद अजीज, मीसम काजमी, सहीम काजमी, नुसरत अजीज, अनवार जैदी, तुन्नू हसन, तालिब जैदी, रिहान आब्दी, शबीह हैदर, अम्मार आब्दी आदि रहेे। एड0 मन्जर हुसैन काजमी ने अपने दफ्तर बड़तला यादगार में नीबू पानी/शिकन्जवी की छबील लगायी। जुलूस के रास्ते मंे शिया यूथ वैलफेयर एसोसिएशन के अल-कासिम ग्रुप ने जुलूस में पानी का इंतेजाम रखा। वहीं बहुत से लोगों ने शर्बत, चाय की छबीले लगायी गयी, जुलूस से पहले और बाद में बहुत से घरों में नियाज करायी गयी।

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