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अमृतपाल और उसके सहयोगी भूख हड़ताल पर नहीं : पुलिस अधिकारी

गुवाहाटी। डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल के अधिकारियों ने उन दावों का खंडन किया कि ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख अमृतपाल सिंह और उसके सहयोगी जेल की ‘खराब स्थितियों’ के कारण भूख हड़ताल पर हैं और यह स्पष्ट किया कि आरोपियों ने अनुरोध किया था। इन्‍हें फ़ोन एक्सेस की अनुमति अब सप्ताह में एक बार दी जाएगी।

अमृतपाल की पत्‍नी किरणदीप कौर ने दावा किया कि उसके पति और उनके कुछ सहयोगी “जेल में खराब सुविधाओं” के विरोध में भूख हड़ताल पर हैं, जिसके बाद डिब्रूगढ़ के डिप्टी कमिश्नर बिस्वजीत पेगू और एसपी श्वेतांक मिश्रा ने शुक्रवार को जेल का दौरा किया।

पेगू ने कहा, ”जेल में कोई भूख हड़ताल नहीं है. मैंने एनएसए बंदियों से व्यक्तिगत रूप से बात की है। उन्होंने फोन सुविधाओं तक पहुंच मांगी और उन्हें सप्ताह में एक बार 15-20 मिनट कॉल करने की अनुमति दी जाएगी।”

उन्होंने कहा, “भोजन की गुणवत्ता के संबंध में एक मौके को छोड़कर कोई शिकायत नहीं है।”

इससे पहले कौर ने दावा किया था कि उसे भूख हड़ताल के बारे में गुरुवार को तब पता चला, जब वह अमृतपाल से मिलने जेल गई।

कौर ने कहा था कि वह अपने पति से मिलने के लिए अमृतसर से डिब्रूगढ़ की यात्रा हर हफ्ते करती है।

अमृतपाल की पत्‍नी के मुताबिक, उसे पता चला कि जेल में खराब खाना मिलने के कारण अमृतपाल समेत सभी सिख कैदी भूख हड़ताल पर हैं।

उसने यह भी कहा कि अधिकारियों ने कैदियों को अपने परिवार के सदस्यों से फोन पर बात करने से मना किया था, जो उनकी हड़ताल का एक कारण था।

कौर ने कहा था : “जेल में आने वाले प्रत्येक परिवार के सदस्य को फोन पर बात करने का विकल्प दिया जाए तो वे 20,000 रुपये से 25,000 रुपये के बीच बचा सकते हैं। सभी परिवार इस लागत को वहन करने में सक्षम नहीं हैं।”

अमृतपाल को पंजाब पुलिस ने 23 अप्रैल को पंजाब के मोगा जिले के एक गुरुद्वारे से गिरफ्तार किया था, जब वह 35 दिनों तक फरार रहा था। एनएसए के तहत उसे असम की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था। अमृतपाल की गिरफ्तारी से पहले उसके आठ साथियों को डिब्रूगढ़ जेल लाया गया था।

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