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एमडीआर टीबी के मरीजों को कहीं भी लाइन में न लगना पड़े : सीएमओ

हापुड़। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. सुनील कुमार त्यागी की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला चिकित्सालय स्थित डीआरटीबी सेंटर पर डीआरटीबी कमेटी की बैठक हुई। बैठक में एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी के रोगियों को प्राथमिकता पर चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। बता दें कि जिला अस्पताल में एमडीआर रोगियों के लिए संचालित डीआरटीबी सेंटर में महिला और पुरुष रोगियों के लिए दो-दो बेड की व्यवस्था ‌है।
बैठक में जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह, विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाहकार डा. रेनु डफे, जिला टीबीएचवी समन्वय मनोज कुमार गौतम के अलावा जिला अस्पताल के सीएमएस डा. प्रदीप मित्तल, बाल रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, मनोरोग चिकित्सक और महिला रोग विशेषज्ञ मौजूद रहीं।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएमओ डा. सुनील त्यागी ने क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम को तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा – टीबी रोगियों का नोटिफिकेशन और फिर उपचार शुरू करने के साथ ही लगातार फालोअप किया जाए। एमडीआर टीबी के रोगियों को त्वचा, नेत्र, हड्डी, महिला रोग और चेस्ट फिजिशियन से परामर्श लेने की जरूरत पड़ती है। एडीआर रोगियों को अलग पर्ची बनाकर दी जाए ताकि वह पर्ची अलग से पहचानी जा सके और किसी भी चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए या फिर जांच आदि कराने के लिए कहीं लाइन में न लगना पड़े। इससे दो लाभ होंगे। एक तो रोगी को अनावश्यक रूप से परेशान होने से बचाया जा सकेगा, दूसरे उसके लाइन में खड़े होने पर संक्रमण देने का खतरा भी कम हो जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. राजेश सिंह ने बताया- जिले में फिलहाल एमडीआर और एक्सडीआर टीबी के कुल 76 रोगी उपचार प्राप्त कर रहे हैं। एमडीआर और एक्सडीआर टीबी उन रोगियों को होती है जो टीबी का उपचार बीच में छोड़ देते हैं या फिर एमडीआर टीबी के रोगी के संपर्क में आने से संक्रमित होते हैं। इस प्रकार के रोगियों का उपचार थोड़ा कठिन और लंबा हो जाता है, इसलिए क्षय रोगियों को सलाह दी जाती है कि टीबी का उपचार नियमित रूप से और पूरा लें, बीच में दवा छोड़ने की गलती न करें।

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