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बिजली संकट से औद्योगिक व आवासीय क्षेत्र हो रहे हैं बुरी तरह से प्रभावित कई प्रतिष्ठानों ने नाईट शिफ्ट भी कर दी हैं बंद

बिजली की बढ़ती किल्लत का सामना औद्योगिक क्षेत्रों को ही नहीं, अपितु आम आदमी को भी करना पड़ रहा है। मांग के अनुरुप बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

गुडग़ांव। बिजली की बढ़ती किल्लत का सामना औद्योगिक क्षेत्रों को ही नहीं, अपितु आम आदमी को भी करना पड़ रहा है। मांग के अनुरुप बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी बिजली संकट मंडराना शुरु हो चुका है। कई प्रतिष्ठानों के संचालकों ने नाईट शिफ्ट को बंद कर दिया है। औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 14 घंटे तक का बिजली कट लग रहा है जिसका सीधा प्रभाव उत्पादन पर पडऩा शुरु हो गया है। यानि कि 50 प्रतिशत तक उत्पादन घट गया है। बिजली के कारण समय पर पुराने ऑर्डर नहीं पूरे हो पा रहे हैं जिससे उद्यमियों ने नए ऑर्डर लेने भी बंद कर दिए बताए जाते हैं। लघु उद्योग बिजली कटौती से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। डीजल महंगा होने के कारण जनरेटर भी नहीं चला पा रहे हैं। प्रतिष्ठानों में काम कम होने के कारण न तो अब कारीगरों का ओवर टाईम लग रहा है और न ही नए कारीगरों को रोजगार मिल पा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में कारीगरों के पलायन का खतरा भी बढ़ सकता है। गुडग़ांव को देश का सबसे बड़ा ऑटो मोबाईल हब माना जाता है। यहां पर कई हजार छोटी-बड़ी इकाईयां कार्यरत हैं। वस्त्रों के एक्सपोर्ट के कारोबार के रुप में भी गुडग़ांव को जाना जाता है। गुडग़ांव से विदेशों में गारमेंट्स का निर्यात किया जाता है। कारोबारियों का कहना है कि कोरोना के बाद कारोबार कुछ पटरी पर लौटा था, लेकिन अब बिजली संकट ने उनकी
परेशानियां और बढ़ाकर रख दी हैं। समय पर ऑर्डर भी पूरे नहीं हो पा रहे हैं। शहर की विभिन्न कालोनियों में भी बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है। हालांकि बिजली निगम ने 6 घंटे बिजली कट का शेड्यूल बनाया है, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में कई-कई घंटे बिजली गायब हो रही है। घर में लगे इन्वर्टर भी जबाव दे गए हैं। पेयजल की आपूर्ति भी बिजली की कटौती के कारण प्रभावित हो रही है। शहर के अधिकांश क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही है। जिससे लोगों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली न होने के कारण लोगों को जागकर रात काटनी पड़ती है।

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