
मेरठ। विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को जनपद में गोष्ठी व शिविरों का आयोजन किया गया। जनपद के जिला अस्पताल सहित स्वास्थ्य केंद्रों पर शिविरों का आयोजन किया गया। शिविरों में 40 साल की उम्र पार कर चुके मरीजों में कान की समस्या ज्यादा मिली। इसके अलावा लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज में ओपीडी में आये मरीजों को कानों के स्वास्थ के प्रति जागरूक किया गया, इसके अलावा वहां गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिनमें कानों के स्वास्थ्य को लेकर चर्चा हुई। इस बार विश्व श्रवण दिवस की थीम है- ईयर एंड हियरिंग केयर फॉर ऑल लेट्स मेक इट रियली।

मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ आर सी गुप्ता ने कहा – कुछ सामाजिक कुरीतियां हैं जैसे नवजात बच्चों या छोटे बच्चों के कान में तेल डालने की प्रथा। यह गलत है। कान में तेल नहीं डालना चाहिए यदि कान में कोई दर्द या परेशानी हो तो चिकित्सक के सम्पर्क कर इलाज कराना चाहिए।
कालेज के नाक कान गला रोग विभाग के कार्यवाहक विभागाध्यक्ष डॉ कपिल कुमार सिंह ने कहा – अपने कान को सुरक्षित रखने के लिए ईयर फोन, ब्ल्यूटूथ, मोबाइल फोन को कान में लगाकर लगातार कई घंटों तक बात नहीं करनी चाहिये। यदि आवश्यक हो तो अधिक से अधिक 30 मिनट तक प्रयोग करने के बाद कम से कम 15 मिनट का गैप लें, जिससे कान सुरक्षित रहेंगे। कान को कभी भी किसी नुकीली वस्तु से खुजाना नही चाहिए यह आपके कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकती है। कान में किसी भी तरह की कोई समस्या हो तो नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर सम्पर्क करना चाहिए।
बाल रोग विभाग की डॉ अनुपमा वर्मा ने बताया – बच्चों में जन्मजात कान की कुछ बीमारियां होती है अगर वह हैं तो बच्चा देर से बोलना शुरू करता है यदि यह लक्षण बच्चे में दिखें तो तुरंत चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए।

सामुदायिक चिकित्सा विभाग की डॉ नीलम गौतम ने कहा – बहरेपन की बीमारी के कई कारण हो सकते हैं। कुछ बहरापन स्थायी होता है तो कुछ अस्थायी होता है। आतिशबाजी, डी जे, लाऊड स्पीकर, तेज आवाज में गाना बजाने से अपने कान को बचाये। जो व्यक्ति ऐसी जगह काम करते हैं जहाँ मशीनों के चलने का बहुत शोर होता है तो ऐसी जगह काम करने वाले लोग कान में ईयर प्लग लगाएं।
कालेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ श्याम सुंदर लाल ने कहा – वृद्धावस्था में कम सुनाई देना तो स्वाभाविक है परंतु इस समय उपलब्ध कान में लगाने वाली डिवाइस, गैजेट्स के लगातार प्रयोग करने के कारण बहरापन युवाओं में भी बड़ी संख्या में देखा जा रहा है जो कि चिंता का विषय है।
इस अवसर पर डॉ श्रवण कुमार, डॉ दिनेश वर्मा, डॉ वैभव साही, डॉ संभु सिंह, डॉ प्रमोद, ऑडियोलॉजिस्ट प्रवीण शुक्ला, नर्सिंग स्टाफ, कर्मचारीगण, मरीज एवम उनके तीमारदार, नाक कान गला रोग के स्नातकोत्तर छात्र छात्रायें आदि उपस्थित रहे।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डा. बीपी कौशिक ने बताया विशेष कैंप में 158 मरीजों की जांच की गई, जिसमें से 48 मरीज ऐसे थे जिनको कम सुनाई देना, मवाद आना जोर की आवाज आना आदि दिक्कत थी। मरीजों को जागरूक करते हुए उन्होंने कहा -कानों की सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। डॉ. कौशिक कहा – आजकल ईयर फोन लोगों को बहरा बनाने का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। बहुत से लोग हर वक्त ईयर फोन लगाए रखते हैं, जो बहुत ही नुकसानदायक है। इसके अत्यधिक प्रयोग से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है और धीरे-धीरे व्यक्ति बहरा होने की ओर अग्रसर होता जाता है। उन्होंने सलाह दी है – बहरापन और कानों से जुड़ी समस्या से बचने के लिए कानों में लीड लगाकर ऊंची आवाज में कुछ भी सुनना बंद करें। मानक से ज्यादा शोर कानों के लिए घातक है। अचानक से हुए तेज धमाके से कान की नसें कमजोर हो जाती हैं। कई बार तेज आवाज से कान का पर्दा फटने तक का डर रहता है। उन्होंने बताया- 70 डेसीबल से ऊपर की आवाज थोड़े समय में और120 डेसीबल से ऊपर की आवाज अचानक ही स्थाई रूप से कानों को नुकसान पहुंचा सकती है।
ऐसे सुरक्षित रखें अपने कान
ईयर फोन लगाकर तेज ध्वनि में गाने कतई न सुनें
तेज आवाज के संपर्क में आने से बचें
ईयर प्लग का उपयोग करें जो शोर को रोकते हैं।
तेज आवाज वाले वातावरण से बचें
कान की अच्छी स्वच्छता बनाए रखें
कानों की सफाई चिकित्सक से ही कराएं
अपनी सुनने की क्षमता की जाँच करें।



