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आज का इतिहास 

नयी दिल्ली। भारत और विश्व इतिहास में 07 फरवरी की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:-

1792 – ऑस्ट्रेलिया एवं प्रुशिया ने फ़्रांस के ख़िलाफ़ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये।
1831 – बेल्जियम में संविधान लागू।
1856 – नवाब वाजिद अली शाह द्वारा अवध राज्य का ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में शांतिपूर्ण विलयन।
1904 – अमेरिका के बाल्टिमोर में आग लगने से पन्द्रह सौ इमारतें जल कर खाक।
1915 – चलती ट्रेन से पहली बार भेजा गया वायरलेस संदेश रेलवे स्टेशन को प्राप्त हुआ।
1935 – आज ही के दिन मशहूर बोर्ड गेम मोनोपोली को कॉपीराइट किया गया था।
1940 – ब्रिटेन में रेलवे का राष्ट्रीयकरण हुआ।
1942 – यूनाइटेड किंगडम ने थाईलैंड के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
1945 – ब्रिटेन, अमेरिका और रूस ने द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण पर चर्चा की।
1947 – अरब और यहूदियों ने फिलीस्तीन को विभाजित करने के ब्रिटेन के प्रस्ताव को खारिज किया।
1959 – फिदेल कास्त्रो ने क्यूबा के नये संविधान की घोषणा की।
1962 – अमेरिका ने क्यूबा से सभी तरह के आयात पर रोक लगाई। जर्मनी की एक कोयला खदान में विस्फोट से 298 मज़दूरों की मौत।
1965 – अमेरिका ने उत्तरी वियतनाम में लगातार हवाई हमले शुरु किये।
1983 – कोलकाता में ईस्टर्न न्यूज एजेंसी की स्थापना।
1987 – जापान द्वारा अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस (ए.एन.सी) को मान्यता।
1992 – स्वदेशी तकनीक से निर्मित पहली पनडुब्बी (आईएनएस शाल्की) को नौसेना में शामिल किया गया।
1997 – सं.रा. अमेरिका के स्टीफ़न स्क्यूवैल अगले तीन वर्ष हेतु अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अध्यक्ष चुने गये।
1999 – जार्डन के शाह हुसैन की मृत्यु, अब्दुला नये शाह बने।
2000 – भारत व अमेरिका के बीच गठित संयुक्त आतंकवाद विरोधी दल की प्रथम बैठक वाशिंगटन में शुरू।
2001 – इस्रायल के प्रधानमंत्री एहुद बराक चुनाव में पराजित, एरियल शेरोन नए प्रधानमंत्री बने।
2003 – फ़्रांस के प्रधानमंत्री ज्यां पियरे रैफ़रिन भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुँचे।
2006 – नेपाल में स्थानीय निकायों हेतु मतदान सम्पन्न।
2008 – केन्द्र सरकार ने सिमी पर प्रतिबन्ध की अवधि को बढ़ाया। इक्वेडोर का तंगुराही ज्वालामुखी फटा।
2009 – राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को महाराष्ट्र के राज्यपाल एससी जमीर ने डी॰ लिट् की उपाधि से नवाजा।
2010 – दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित 19वाँ अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला समाप्त हो गया। नौ दिनों तक चले इस पुस्तक मेले में लगभग दो हज़ार प्रकाशकों ने भाग लिया।

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