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शिवराज के मंत्री ने की माता सीता की तलाकशुदा महिला से तुलना, बोले- धरती में समाना आत्महत्या जैसा

मध्य प्रदेश के नागदा खाचरोद के कारसेवकों के सम्मान समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने तलाकशुदा स्त्री की तुलना माता सीता से कर बैठे।

मध्य प्रदेश के नागदा खाचरोद के कारसेवकों के सम्मान समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने तलाकशुदा स्त्री की तुलना माता सीता से कर बैठे। मंत्री मोहन यादव रविवार को वंदे मातरम् ग्रुप की ओर से 94 कारसेवकों के सम्मान समारोह में मंच से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान बोलते हुए उन्होंने पहले श्री राम के जीवन के बारे में कहा और फिर माता सीता के जीवन को कष्ट भरा बताते हुए उन्होंने माता सीता की तुलना तलाकशुदा महिला से कर दी। उन्होंने कहा कि इतना संकट और कष्ट झेलने के बावजूद माता सीता श्री राम के प्रति हमेशा अच्छा ही सोचती रहीं, बच्चों को भी अच्छी परवरिश दी। आज के समाज से तुलना करते हुए मंत्री मोहन यादव ने कहा कि ऐसे जीवन को आज के समय में तलाक के बाद वाला जीवन समझा जा सकता है। इसके बावजूद माता सीता ने भगवान राम के प्रति अपनी निष्ठा के साथ कोई समझौता नहीं किया।

समारोह में 94 कारसेवकों को सम्मानित किया गया। इनमें कई दिवंगत हो चुके हैं। उनके परिजनों को नागरिक अभिनंदन व प्रमाणपत्र भेंट किया गया। मंत्री मोहन यादव ने मंच से उद्बोधन देते हुए रामायण पाठ कार्यकर्ताओं को पढ़ाया जिसमें उन्होंने भगवान राम के वनवास से लेकर सीता माता और उनके पुत्र लव कुश का जीवन वर्णन किया। जीवन वर्णन करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने माता सीता की तुलना एक तलाकशुदा स्त्री से कर दी। वंही मंत्री ने कहा कि मर्यादा के कारण राम को सीता को छोड़ना पड़ा। उन्होंने वन में बच्चों को जन्म दिया। कष्ट झेलकर भी राम की मंगलकामना करती रहीं। आज के दौर में ये जीवन तलाक के बाद की जिंदगी जैसा है।

भगवान राम और रामराज्य के बारे में बोलते हुए उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने कहा कि अच्छी भाषा में बोला जाए तो धरती फटने पर माता उसमें समा गई। सरल और संस्कारी भाषा में कहा जाए, तो उनकी पत्नी ने उनके सामने शरीर छोड़ा। शरीर छोड़ने को आत्महत्या के रूप में माना जाता है, लेकिन इतने कष्ट के बावजूद भी भगवान राम ने जीवन कैसे बिताया होगा, जिस सीता के बिना एक क्षण भी कल्पना करना मुश्किल है, लेकिन उसके बावजूद भी भगवान राम ने राम राज्य के बारे में अपना जीवन दिया। आगे बढ़ेंगे तो उनके सामने ही भगवान लक्ष्मण ने भी प्राण त्यागे, फिर भी रामराज्य चलता रहा।

वीडियो वायरल होने के बाद उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कार्यक्रम का आयोजन कारसेवकों को सम्मानित और उनके संघर्ष और संकल्प को याद करने के लिए किया गया था इसलिए रामराज्य और भगवान राम और माता सीता से जुडी कुछ बातें कहीं। उन्होंने कहा कि मुख्य बात माता सीता और भगवान राम के संघर्ष की थी। उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने कहा कि बात को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है जबकि उनका आशय बिल्कुल ही अलग था। उन्होंने कहा कि अब गलत इरादे से लोग वीडियो प्रसारित कर रहे हैं और छवि ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं।

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