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आधा दिसंबर बीत गया लेकिन न पहले जैसी सर्दी आई, ना बर्फबारी, जानिए क्या है इसका कारण

मौसम विभाग के अनुसार इस साल अभी तक हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी में 97 प्रतिशत तो जम्मू कश्मीर में 80 प्रतिशत तक की कमी आई है। पहाड़ी राज्यों के अलावा बिहार-यूपी, दिल्ली में भी सर्दी अभी तक वैसी नहीं पड़ी, जैसी पड़ा करती थी। मौसम के मिजाज में हुए इस बदलाव पर वैज्ञानिकों ने बड़ी जानकारी दी है।

मौसम का मिजाज अब पहले जैसा नहीं रहा। सर्दी हो या गर्मी या फिर बरसात, पहले जिस महीने में जैसा मौसम रहता था, अब वैसा नहीं रहता है। इस कारण न केवल लोगों की जीवनशैली प्रभावित होती है बल्कि साथ-साथ खेती और प्रोडक्शन का टाइम सर्किल भी चेंज हो रहा है। अभी का ही उदाहरण ले तो आधा दिसंबर बीच चुका है, लेकिन न पहले जैसी सर्दी आई और ना ही पहले जैसी पहाड़ों पर बर्फबारी। इस समय तक पहले बर्फबारी के कारण हिमालय की चोटियां सफेद हो जाया करती थी लेकिन अभी भूरी है। कई जगह लोग अभी भी रात को पंखा चलाकर सो रहे हैं। दफ्तरों और गाड़ियों में एसी भी चल रहा है। मौसम के मिजाज में आए इस बदलाव को लेकर कई तरह की बातें की जा रही हैं, हालांकि इस बदलाव का स्पष्ट कारण अभी तक क्लियर नहीं हो सका है। मौसम वैज्ञानिक इस बदलाव के पीछे कई कारणों को अहम मानते है।

बात इस साल की करें तो भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार मजबूत पश्चिमी विक्षोभ की अनुपस्थिति के कारण दिसंबर में हिमालय के ऊपरी और निचले इलाकों में शायद ही कोई हिमपात हुआ हो। इस कारण 17 दिसंबर तक हल्की सर्दी है। हिमालय की कई चोटियाँ इस समय भी भूरी हैं जबकि उन्हें इस समय तक कम से कम दो मध्यम हिमपात होना चाहिए था।

मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ के बारे में बताया कि यह भूमध्य सागर में उत्पन्न होने वाला एक चक्रवाती गठन हैं जो नवंबर से उत्तर-पश्चिम भारत में सर्दी और हिमपात लाता है। आमतौर पर उत्तर पश्चिम भारत में नवंबर, दिसंबर में दो-तीन पश्चिमी विक्षोभ देखा जाता है। लेकिन इस साल 10 नवंबर के बाद से ऐसा कुछ भी नहीं देखा गया, जिस कारण हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी में 97% कमी आई है।

आईएमडी के अनुसार दिसंबर में जम्मू और कश्मीर में बर्फबारी में 80% तक की कमी आई है। उत्तराखंड में बर्फबारी नहीं हुई। कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण लेह क्षेत्र और जम्मू-कश्मीर के कुछ और हिस्सों में 9 दिसंबर को हल्की बर्फबारी दर्ज की गई। मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरके जेनामणि ने कहा इस बार हिमालय के कई ऊपरी इलाकों में बर्फबारी नहीं हुई है। यह मुख्य रूप से इसलिए है क्योंकि नवंबर के बाद से इस क्षेत्र में कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ प्रभावित नहीं हुआ है।

हालांकि वरिष्ठ वैज्ञानिक आरके जेनामणि ने कहा कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह असामान्य है। हमें यह देखना होगा कि दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में इस क्षेत्र में एक मजबूत डब्ल्यूडी हमला करता है या नहीं। आज तक हमारे पास इस क्षेत्र को तुरंत प्रभावित करने वाले WD के अनुमान नहीं हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि शीत लहर नहीं होगी। इसका असर तापमान में भी देखने को मिल रहा है।

मनाली में गुरुवार को अधिकतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, दोनों सामान्य से 2 डिग्री अधिक है। कुल्लू में अधिकतम 22.1, सामान्य से 4 डिग्री अधिक और न्यूनतम 0.6 डिग्री, सामान्य से 0.1 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया; मसूरी में न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 5 डिग्री और अधिकतम 19.8 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 6 डिग्री अधिक दर्ज किया गया; शिमला में न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 5 डिग्री अधिक था।

बर्फबारी के लिए क्रिसमस तक करना पड़ेगा इंतजार
जलवायु और मौसम विज्ञान के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू और कश्मीर सहित पहाड़ी राज्यों में दिसंबर में लगभग कोई बर्फबारी नहीं हुई है। अक्टूबर और नवंबर में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में कुछ बर्फबारी हुई थी लेकिन पर्याप्त नहीं थी। यह बहुत ही असामान्य है। इस महीने केवल दो कमजोर पश्चिमी विक्षोभों ने पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित किया। मौसम विभाग की माने तो क्रिसमस के बाद बर्फबारी हो सकती है।

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