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पुलिस की भूमिका सवाल… रासुका निरस्ती के आदेश की क्यों नहीं कराई पुष्टि
जमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलईजमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलईजमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलईजमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलईजमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलईजमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलईजमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलईजमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलईजमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलईजमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलईजमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलईजमीन के जालसाज दीपक मद्दा पर आधा दर्जन मुकदमों दर्ज करने के बाद भी नहीं कर पाई थी गिरफ्तार, फर्जी रासुका निरस्ती आदेश के बाद अब खुल रही कलई
इंदौर। जमीन के जालसाज दीपक मद्दा ने पुलिस को ही पलीता लगा दिया। रासुका का फर्जी आदेश तैयार कर पेश करने के मामले में पुलिस ने मद्दा पर धोखाधड़ी व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मुकदमा दर्ज कर लिया। घटना के बाद अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब आदेश पेश हुआ था तो पुलिस ने जांच क्यों नहीं करवाई? पुलिस की भूमिका पर यों भी संदेह हो रहा है कि आधा दर्जन गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई।
एक दर्जन गृह निर्माण संस्था की जमीन खरीद-फरोख्त में शामिल दीपक जैन उर्फ मद्दा उर्फ दिलीप सिसौदिया के खिलाफ 14 फरवरी 2022 को रासुका की कार्रवाई की गई थी। उससे पहले प्रशासनिक व सहकारी अफसर ने विभिन्न थानों पर आधा दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज कराए थे। इतनी बड़ी कार्रवाई होने के बाद में एक-एक करके दीपक मद्दा की जमानत हो गई। बात रही रासुका की तो उसने गृह विभाग के अवर मुख्य सचिव का निरस्ती के आदेश वाला एक पत्र थाने पर पेश करा दिया।
उसके बाद से मद्दा फिर से जमीन के कारोबार में लग गया। सरकारी महकमे को बाद में भनक लगी कि रासुका की निरस्ती वाला पत्र फर्जी है तो अफसरों के होश उड़ गए। गोपनीय तौर पर जांच कराई तो कहानी सच निकली। इसके बाद दो दिन पहले मद्दा के खिलाफ खजराना पुलिस ने धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर पेश करने का मुकदमा दर्ज कर लिया।
गौरतलब है कि रासुका जैसे गंभीर मामले में आम तौर पर हाई कोर्ट से ही आरोपित को राहत मिलती है। बहुत कम मामले होते हैं, जिनके आदेश गृह विभाग से निरस्त हो जाते हैं। इतना गंभीर विषय होने पर भी पुलिस ने आदेश की जांच नहीं करवाई। महज एक पत्र ही गृह विभाग को लिखकर उसकी पुष्टि करना थी, लेकिन पुलिस ने इतनी भी जहमत नहीं उठाई।
उसके बाद से मद्दा फिर से जमीन के कारोबार में लग गया। सरकारी महकमे को बाद में भनक लगी कि रासुका की निरस्ती वाला पत्र फर्जी है तो अफसरों के होश उड़ गए। गोपनीय तौर पर जांच कराई तो कहानी सच निकली। इसके बाद दो दिन पहले मद्दा के खिलाफ खजराना पुलिस ने धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर पेश करने का मुकदमा दर्ज कर लिया।
गौरतलब है कि रासुका जैसे गंभीर मामले में आम तौर पर हाई कोर्ट से ही आरोपित को राहत मिलती है। बहुत कम मामले होते हैं, जिनके आदेश गृह विभाग से निरस्त हो जाते हैं। इतना गंभीर विषय होने पर भी पुलिस ने आदेश की जांच नहीं करवाई। महज एक पत्र ही गृह विभाग को लिखकर उसकी पुष्टि करना थी, लेकिन पुलिस ने इतनी भी जहमत नहीं उठाई।
मुहिम में नहीं आया था पुलिस के हाथ
गौरतलब है कि जैसे ही प्रशासन ने सहकारिता की मुहिम छेड़ी थी, वैसे ही मद्दा फरार हो गया था। छह मुकदमे दर्ज होने के बावजूद भी वह पुलिस के हाथ नहीं आया। इस दौरान व इंदौर, रतलाम और भोपाल में कई बार घूमते हुए देखा गया था। इतना लंबा समय फरार होने के बावजूद पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई, जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं? क्या पुलिस मद्दा को जमानत मिलने का इंतजार कर रही थी, जबकि कई माफियाओं की गिरफ्तारी हुई। चर्चा तो ये भी है कि मद्दा भाजपा सरकार और संगठन के कुछ नेताओं के लगातार संपर्क में था। वे पूरी तरह से उसे बचाने में जुटे हुए थे।
गौरतलब है कि जैसे ही प्रशासन ने सहकारिता की मुहिम छेड़ी थी, वैसे ही मद्दा फरार हो गया था। छह मुकदमे दर्ज होने के बावजूद भी वह पुलिस के हाथ नहीं आया। इस दौरान व इंदौर, रतलाम और भोपाल में कई बार घूमते हुए देखा गया था। इतना लंबा समय फरार होने के बावजूद पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई, जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं? क्या पुलिस मद्दा को जमानत मिलने का इंतजार कर रही थी, जबकि कई माफियाओं की गिरफ्तारी हुई। चर्चा तो ये भी है कि मद्दा भाजपा सरकार और संगठन के कुछ नेताओं के लगातार संपर्क में था। वे पूरी तरह से उसे बचाने में जुटे हुए थे।
रासुका आदेश आज भी यथावत
रासुका निरस्ती का आदेश फर्जी निकलने के बाद में कलेक्टर का रासुका आदेश आज भी यथावत है। इसके अलावा नया मुकदमा मद्दा पर और दर्ज हो गया। बताते हैं कि इसकी भनक लगते ही दो दिन पहले मद्दा शहर से फरार हो गया था। इधर, शहर के एक प्रतिष्ठित अभिभाषक अब कोर्ट में एक याचिका लगाने जा रहे हैं, जिसमें ये जांच कराए जाने की मांग की जाएगी कि फर्जी आदेश पर कौन-कौन सी जमानत में मद्दा को मदद मिली थी। ऐसी सभी जमानतों को भी निरस्त किया जाए। कोर्ट को गुमराह कर धोखा करने का भी मुकदमा कायम किया जाए।
रासुका निरस्ती का आदेश फर्जी निकलने के बाद में कलेक्टर का रासुका आदेश आज भी यथावत है। इसके अलावा नया मुकदमा मद्दा पर और दर्ज हो गया। बताते हैं कि इसकी भनक लगते ही दो दिन पहले मद्दा शहर से फरार हो गया था। इधर, शहर के एक प्रतिष्ठित अभिभाषक अब कोर्ट में एक याचिका लगाने जा रहे हैं, जिसमें ये जांच कराए जाने की मांग की जाएगी कि फर्जी आदेश पर कौन-कौन सी जमानत में मद्दा को मदद मिली थी। ऐसी सभी जमानतों को भी निरस्त किया जाए। कोर्ट को गुमराह कर धोखा करने का भी मुकदमा कायम किया जाए।



