शहर में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्वच्छता में अव्वल लाने के लिए नगरपालिका के तमाम अधिकारियों ने कागजों में तो खूब योजनाएं बनाई और संसाधनों पर पानी की तरह रुपए भी बहाए। लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण की परीक्षा में कचरे के निष्पादन के नंबर है ओर इसे लेने के लिए जो कागजों में प्लान दिखाया वह अमल नहीं हो पाया है। कम्पोजिट पिट तैयार किए लेकिन इनमें खाद तो नहीं बनी बल्कि यही टूट गए। अनदेखी के कारण कम्पोजिट पिट के यह हाल है। अब स्वच्छता सर्वेक्षण २०२३ की नई गाईडलाइन भी आ चुकी है ओर इसमें भी इसके अधिक अंक है। बावजूद इन पर स्वच्छता अमले का ध्यान नहीं है।
एक लाख फूंककर छट बगीजों में बनाए थे पिट
नपा द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर जुटाने के लिए नवाचार भी किए थे। इनमें बगीचों व मंदिरों से निकलने वाले फूल व पत्तियों से खाद बनाने की योजना भी थी। करीब एक लाख रुपए खर्च कर शहर के छह बगीचों में कम्पोजिट पिट बनाए गए। लेकिन पिट तैयार होने के बाद खाद बनाने में नपा अमले ने रूचि नहीं ली और अब स्थिति यह है कि बगीचों में बनाए गए कम्पोजिट पिट टूट गए और जो बने हुए है वहां खाद ही नहीं बन रही है। इसी तरह अस्पताल प्रबंधन ने भी अस्पताल परिसर में ही पिट तैयार किया था ताकि अस्पताल के कचरे से खाद बनाई जा सके, लेकिन यहां भी खाद नहीं बन सकी।
नपा द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर जुटाने के लिए नवाचार भी किए थे। इनमें बगीचों व मंदिरों से निकलने वाले फूल व पत्तियों से खाद बनाने की योजना भी थी। करीब एक लाख रुपए खर्च कर शहर के छह बगीचों में कम्पोजिट पिट बनाए गए। लेकिन पिट तैयार होने के बाद खाद बनाने में नपा अमले ने रूचि नहीं ली और अब स्थिति यह है कि बगीचों में बनाए गए कम्पोजिट पिट टूट गए और जो बने हुए है वहां खाद ही नहीं बन रही है। इसी तरह अस्पताल प्रबंधन ने भी अस्पताल परिसर में ही पिट तैयार किया था ताकि अस्पताल के कचरे से खाद बनाई जा सके, लेकिन यहां भी खाद नहीं बन सकी।
कचरे से जैविक खाद तैयार कर बगीचों में देने की योजना अधूरी
स्वच्छता अभियान के तहत शहर को सुंदर बनाने के साथ ही नवाचार करते हुए नगरपालिका ने कचरे से खाद बनाने की योजना बनाई। इसके तहत शहर के बड़े उद्यानों में निकलने वाले जैविक कचरे और मंदिरों से आने वाले फूलों से खाद तैयार करने के लिए दशपुर उद्यान, किटियानी स्थित अपना बाग, तेलिया तालाब पिकनिक स्पाट बगीचा, पुराना कलेक्टर कार्यालय का बगीचा, रामघाट बगीचा एवं पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में एक लाख रुपए की लागत से कंपोजिट पिट तैयार किए गए। वर्ष 2018 में पिट तैयार हो गए थे। पशुपतिनाथ मंदिर क्षेत्र में फूलों से खाद बनाने का सपना सिर्फ सपना ही रह गया। यहां मंदिर परिसर में बने कंपोजिट पिट में एक बार भी खाद नहीं बनाई गई। अब तक यह पिट टूट गया। साथ ही अलावा दशपुर कुंज, किटियानी अपना बाग, तेलिया तालाब पिकनिक स्पाट, पशुपतिनाथ मंदिर परिक्षेत्र सहित छह स्थानों पर बनाए कंपोजिट पिट भी बेकार ही पड़े हैं। कचरे से खाद बनाने के लिए बनाए गए पिटों का कुछ बगीचों में एक बार उपयोग हुआ तो कहीं हुआ ही नहीं। वर्तमान में सभी पिट टूट गए हैं और कहीं भी खाद नहीं बन रहा है।
स्वच्छता अभियान के तहत शहर को सुंदर बनाने के साथ ही नवाचार करते हुए नगरपालिका ने कचरे से खाद बनाने की योजना बनाई। इसके तहत शहर के बड़े उद्यानों में निकलने वाले जैविक कचरे और मंदिरों से आने वाले फूलों से खाद तैयार करने के लिए दशपुर उद्यान, किटियानी स्थित अपना बाग, तेलिया तालाब पिकनिक स्पाट बगीचा, पुराना कलेक्टर कार्यालय का बगीचा, रामघाट बगीचा एवं पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में एक लाख रुपए की लागत से कंपोजिट पिट तैयार किए गए। वर्ष 2018 में पिट तैयार हो गए थे। पशुपतिनाथ मंदिर क्षेत्र में फूलों से खाद बनाने का सपना सिर्फ सपना ही रह गया। यहां मंदिर परिसर में बने कंपोजिट पिट में एक बार भी खाद नहीं बनाई गई। अब तक यह पिट टूट गया। साथ ही अलावा दशपुर कुंज, किटियानी अपना बाग, तेलिया तालाब पिकनिक स्पाट, पशुपतिनाथ मंदिर परिक्षेत्र सहित छह स्थानों पर बनाए कंपोजिट पिट भी बेकार ही पड़े हैं। कचरे से खाद बनाने के लिए बनाए गए पिटों का कुछ बगीचों में एक बार उपयोग हुआ तो कहीं हुआ ही नहीं। वर्तमान में सभी पिट टूट गए हैं और कहीं भी खाद नहीं बन रहा है।
बिना खाद बनाए ही टूट गए कंपोजिट पिट
पशुपतिनाथ मंदिर परिक्षेत्र में सुलभ काम्प्लेक्स के पीछे कचरे से खाद बनाने के लिए कम्पोजिट पिट बनाया गया था। मंदिर से निकलने वाले फूलों से यहां खाद बनाने की योजना बनाई गई थी। लेकिन यहां एक बार भी खाद नहीं बनी है। अब पिट की दिवारें भी क्षतिग्रस्त होने लगी है। यहां पर कर्मचारियों ने पिट में कचरा जरूर भरा, लेकिन कचरें को खाद बनाने की प्रक्रिया नहीं की। पिट में एक बार भी खाद नहीं बनी है। इसके साथ ही दशपुर कुंज और अस्पताल परिसर सहित अन्य बगीचों में बने कंपोजिट पिट भी क्षतिग्रस्त हो गए।
पशुपतिनाथ मंदिर परिक्षेत्र में सुलभ काम्प्लेक्स के पीछे कचरे से खाद बनाने के लिए कम्पोजिट पिट बनाया गया था। मंदिर से निकलने वाले फूलों से यहां खाद बनाने की योजना बनाई गई थी। लेकिन यहां एक बार भी खाद नहीं बनी है। अब पिट की दिवारें भी क्षतिग्रस्त होने लगी है। यहां पर कर्मचारियों ने पिट में कचरा जरूर भरा, लेकिन कचरें को खाद बनाने की प्रक्रिया नहीं की। पिट में एक बार भी खाद नहीं बनी है। इसके साथ ही दशपुर कुंज और अस्पताल परिसर सहित अन्य बगीचों में बने कंपोजिट पिट भी क्षतिग्रस्त हो गए।
अस्पताल प्रबंधन ने 70 हजार खर्च कर दिए पर खाद नहीं बनी
स्वच्छता मिशन में जिला अस्पताल प्रबंधन ने अस्पताल से निकलने वाले कचरे से जैविक खाद बनाने की योजना बनाई। वर्ष 2017 में सीएमएचओ निवास के सामने 70 हजार रुपए खर्च कर कचरा घर एवं कंपोजिट पिट तैयार कराया गया। 17 अक्टूबर 2017 को कचराघर एवं कंपोजिट पिट तैयार हो गया था। लेकिन तीन साल बाद भी पिट का उपयोग नहीं हो पाया है। बिना खाद बनाए ही पिट टूट गया है। योजना के तहत अस्पताल से निकलने वाले कचरे को दो भागों गीला एवं सूखा कचरा में बांटकर फल, सब्जी के छिलके, झूठन, पेड़ों के पत्त, धूल मिट्टी सहित अन्य प्राकृतिक चीजों को कंपोजिट पिट में डालकर जैविक खाद तैयार करना थी। यहां तैयार होने वाली खाद से अस्पताल के बगीचों एवं आसपास के पेड़ञपौधों में उपयोग करने की योजना थी।
स्वच्छता मिशन में जिला अस्पताल प्रबंधन ने अस्पताल से निकलने वाले कचरे से जैविक खाद बनाने की योजना बनाई। वर्ष 2017 में सीएमएचओ निवास के सामने 70 हजार रुपए खर्च कर कचरा घर एवं कंपोजिट पिट तैयार कराया गया। 17 अक्टूबर 2017 को कचराघर एवं कंपोजिट पिट तैयार हो गया था। लेकिन तीन साल बाद भी पिट का उपयोग नहीं हो पाया है। बिना खाद बनाए ही पिट टूट गया है। योजना के तहत अस्पताल से निकलने वाले कचरे को दो भागों गीला एवं सूखा कचरा में बांटकर फल, सब्जी के छिलके, झूठन, पेड़ों के पत्त, धूल मिट्टी सहित अन्य प्राकृतिक चीजों को कंपोजिट पिट में डालकर जैविक खाद तैयार करना थी। यहां तैयार होने वाली खाद से अस्पताल के बगीचों एवं आसपास के पेड़ञपौधों में उपयोग करने की योजना थी।



