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गुजरात में एकतरफा मोदी लहर, रुझानों में भाजपा रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन की ओर

शुरुआती रुझानों में भाजपा जबरदस्त बढ़त बनाई हुई हैं। गुजरात में एकतरफा मोदी लहर दिखाई दे रहा है। गुजरात में अब तक भाजपा 150 से ज्यादा सीटों पर आगे हैं। वहीं, कांग्रेस को भारी नुकसान होता दिखाई दे रहा है।

गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह से गुजरात के चुनावी नतीजों को लेकर एक सवाल पूछा गया था। उन्होंने अपने जवाब में कहा था कि गुजरात में भाजपा इस बार अपने सभी रिकॉर्ड तोड़ देगी। फिलहाल, आज गुजरात चुनाव के नतीजे से आ रहे हैं। शुरुआती रुझानों में भाजपा जबरदस्त बढ़त बनाई हुई हैं। गुजरात में एकतरफा मोदी लहर दिखाई दे रहा है। गुजरात में अब तक भाजपा 150 से ज्यादा सीटों पर आगे हैं। वहीं, कांग्रेस को भारी नुकसान होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस 20 के आसपास की सीटों पर बढ़त बनाई है। वहीं, आम आदमी पार्टी 8 पर आगे चल रही है। गुजरात में भाजपा की ओर से जबरदस्त तरीके से प्रचार किया गया था। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाल रखा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में गुजरात में 31 से ज्यादा चुनावी रैलियों को संबोधित किया था। इसके अलावा उन्होंने 3 बड़े रोड शो भी किए थे। गुजरात में भाजपा 27 सालों से सत्ता में है। इस बार उसकी यह 7वीं जीत होगी। भाजपा पश्चिम बंगाल में वाम दलों के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए दिखाई दे रही है। कुल मिलाकर देखें तो गुजरात में इस वक्त भाजपा एक तरफा बढ़त बनाकर रख रही है और कहीं ना कहीं अगर नतीजे भी इसी तरीके के रहते हैं तो भाजपा के लिए बड़ी कामयाबी कही जा सकती है। गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल अपने निर्वाचन क्षेत्र घाटलोडिया में कुल 23,713 मतों से आगे चल रहे हैं। मोरबी से बीजेपी उम्मीदवार कांतिलाल अमृतिया कुल 10,156 वोटों से आगे चल रहे हैं।

कांतिलाल अमृतिया ने कथित तौर पर अक्टूबर में मोरबी पुल के ढहने के दौरान कई लोगों की जान बचाई थी। भाजपा ने राज्य में 27 साल के शासन के बाद सत्ता विरोधी भावनाओं से जूझते हुए हाल के चुनाव लड़े। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पार्टी के ‘तुरुप का इक्का’ थे और सत्तारूढ़ दल ने सत्ता विरोधी लहर के मुकाबले के लिये ‘ब्रांड मोदी’ पर भरोसा किया। चुनावों में प्रमुख मुद्दों में बेरोजगारी, मूल्य वृद्धि, राज्य के कुछ हिस्सों में पानी नहीं पहुंचना, बड़ी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और किसानों को अत्यधिक बारिश के कारण फसल क्षति का उचित मुआवजा नहीं मिलना था। इस बार मतदान प्रतिशत 2017 की तुलना में लगभग चार प्रतिशत कम हुआ। राज्य में 2017 में 68.39 प्रतिशत के मुकाबले इस बार सिर्फ 64.33 प्रतिशत मतदान हुआ।

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