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भोजन को चबा-चबा के खाना चाहिए राम रहीम

पूज्य गुरु जी ने खाने को किस प्रकार खाना चाहिए, के बारे में समझाते हुए फरमाया कि जब आप खाना खाते हैं, पहली कोर मुंह में चबा-चबा कर खाएं

बागपत(विनीत कौशिक)। पूज्य गुरु जी ने खाने को किस प्रकार खाना चाहिए, के बारे में समझाते हुए फरमाया कि जब आप खाना खाते हैं, पहली कोर मुंह में चबा-चबा कर खाएं। आपने कभी बंदर देखा है,नहीं देखा है तो देखना वो खाना खाएगा तो पहले अपने गलाफ में ले जाता है, अंदर नहीं लेकर जाता कभी भी, वो चैक करता है कि मैंने कोई जहरीली चीज तो नहीं खा ली। क्योंकि जीभा के संपर्क में आने से पूरी बॉडी पर असर जल्द होता है। तो उसी तरह पहली कोर जो आप तोड़कर खाते हैं तो पूरा ध्यान केंन्द्रित रखें। हमारे गुरुकुलों में सिखाया जाता था कि पहली कोर जीव-जंतुओंं के लिए रखो और फिर प्रार्थना करके खाओ, ताकि ध्यान केन्द्रित रहे। पहली कोर जब खा रहे हैं तो पता चल जाता है कि स्वाद कैसा है, कहीं जहरीला तो नहीं, कहीं इसमें कुछ ऐसे तत्व तो नहीं जो सेहत को नुकसान पहुंचा देंगे। लेकिन आप तो देखते ही नहीं, उठाया और आधा चबाया, आधा निगल लिया, ऊंट की तरह अंदर। बाद में कुछ भी होता रहे ध्यान तो देते नहीं। जबकि चबा चबा के खाना जरूरी होता है। तो हमारे कहने का मलतब खान पान में जहर हो गय।

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