यूपी में बिजली कंपनियों ने कबूला उपभोक्ताओं से 4 करोड़ अधिक वसूली रकम, अब करेंगे वापस
यूपी में कास्ट डाटा बुक के विपरीत की गई अधिक वसूली के मामले में सभी विद्युत वितरण कंपनियों ने उ.प्र. राज्य विद्युत नियामक आयोग में बताया 4 करोड़ 1 लाख 22506 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं से अधिक लिए गए।
यूपी में कास्ट डाटा बुक के विपरीत बिजली उपभोक्ताओं से की गई अधिक वसूली के मामले में राज्य की सभी विद्युत वितरण कंपनियों के प्रबंध निदेशकों ने मंगलवार को उ.प्र. राज्य विद्युत नियामक आयोग में हाजिर होकर शपथ पत्र दाखिल किया। आयोग को बताया कि 4 करोड़ 1 लाख 22506 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं से अधिक लिए गए हैं, जिन्हें वापस किया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनियां झूठ बोल रही हैं। उपभोक्ताओं से कनेक्शन इस्टीमेट में 100 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त वसूली की गई है। सुनवाई के दौरान आयोग के चेयरमैन आरपी सिंह और सदस्य बीके श्रीवास्तव दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी के जवाब से संतुष्ठ नहीं हुए। उनसे कहा कि सभी खंडों की रिपोर्ट के साथ 22 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से हाजिर हों। मौजूदा समय नें नई कॉलोनियों में बिजली सप्लाई की व्यवस्था नहीं रहती है। अब यहां कनेक्शन लेने के लिए ट्रांसफार्मर से लेकर पोल तक का पैसा उपभोक्ताओं को खुद देना पड़ता है। इसके लिए जेई और एसडीओ की तरफ से एक सर्वे कराकर बजट दिया जाता है।

यह बजट कॉस्ट डाटा बुक में तय रेट से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अब पावर कॉर्पोरेशन ने एक आदेश जारी किया, जिसमें इंटर्नल स्टाक इश्यू रेट के आधार पर एस्टीमेट बनाया जाने लगा। ये आदेश जून मे जारी किया गया। इंटर्नल स्टाक इश्यू रेट में बिजली का सामान कॉस्ट डाटा बुक से करीब 27 से 35% तक अधिक है। उपभोक्ताओं का जो एस्टीमेट बना, वो इंटर्नल स्टॉक इश्यू रेट के आधार पर बनाया गया। ये एस्टीमेट कॉस्ट डाटा बुक के हिसाब से होना चाहिए था। इससे बाद में पता चला कि जो पूरा बिल है, वह कॉस्ट डाटा बुक से अधिक है।



