सफलता की कुंजी है आत्मबल, इसे बढ़ाये : राम रहीम
शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा से संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां ने ऑनलाइन गुरूकुल के माध्यम से रूहानी सत्संग फरमाया और देश-विदेश की साध-संगत राम रहीम सिंह के वचनों को सुनकर व दर्शन करके निहाल हुई।
बागपत। शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा से संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां ने ऑनलाइन गुरूकुल के माध्यम से रूहानी सत्संग फरमाया और देश-विदेश की साध-संगत राम रहीम सिंह के वचनों को सुनकर व दर्शन करके निहाल हुई।

इस दौरान ऑनलाइन गुरूकुल के माध्यम से राम रहीम ने हरियाणा के शाह सतनाम जी धाम सिरसा, पंजाब के भटिंडा स्थित शाह सतनाम जी रूहानी धाम डेरा राजगढ़-सलाबतपुरा, राजस्थान के नीम का थाना, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, बड़ी व दिल्ली के कंझावला नामचर्चा घर में पहुंचे लाखों लोगों का नशा और बुराइयां छुड़वाकर गुरूमंत्र, नाम शब्द दिया। इस अवसर पर उन्होंने नशे व बुरी आदतों से कैसे बचा जाए, आत्मबल जो सफलता की कुंजी है, इसे कैसे बढ़ाया जाए, भगवान जो सर्वशक्तिमान है, उसके दर्शनों के काबिल कैसे बना जा सकता है, का तरीका भी बताया। संत राम रहीम ने रूहानी सत्संग के दौरान ब्रह्मचर्य और गुरूकुल की शिक्षा के बारे में बताते हुए फरमाया कि पुरातन समय में चार आश्रम बनाए गए। वेदकाल समय की बात करो तो उसमें ब्रहमचर्य आश्रम, गृहस्थ आश्रम, वानप्रस्थ और फिर संन्यास आश्रम आते थे। सभी धर्मों में इनके बारे में लिखा हुआ है। हमारे जो सबसे पुराने पाक-पवित्र ग्रंथ हैं, वो हैं पवित्र वेद। जो हजारों साल पुराने हैं, ये अब साबित हो चुका है। बाकी धर्म भी समान बात कहते हैं। ब्रह्मचर्य आश्रम में 25 साल तक पढ़ाया जाता था। जंगलात या ऐसी जगहों पर रखा जाता था, जहां का वातावरण शुद्ध होता था। सुबह उठते, वहां हवन यज्ञ होते थे, जिसका मतलब था कि वातावरण शुद्ध हो जाए। घी से शुरूआत होती थी। उसमें आहूतियां डाली जाती थी, ताकि वातावरण में महक फैल जाये।


