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उप्र में MSME क्षेत्र ने निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया

पिछले पांच सालों में 41 प्रतिशत की वृद्धि से उत्साहित होकर अब अगले पांच सालों में मौजूदा स्तर को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम क्षेत्र (एमएसएमई) के उद्योगों से होने वाले निर्यात में पिछले पांच सालों में 41 प्रतिशत की वृद्धि से उत्साहित होकर अब अगले पांच सालों में मौजूदा स्तर को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग और निर्यात संवर्धन विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष पेश 100 दिन, छह महीने, दो साल और पांच साल के कामकाज के एजेंडे में यह जानकारी दी गयी है। विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष किये गये प्रस्तुतीकरण का अवलोकन करने के बाद मुख्यमंत्री योगी ने विभाग को निवेश और उत्पादन बढ़ाने, बड़े पैमाने पर युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने और बढ़ावा देने के लिए समयबद्ध तरीके से अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से रविवार को जारी बयान के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार अगले 100 दिनों में आगरा, कानपुर और गोरखपुर में तीन फ्लैटेड फैक्ट्री परिसरों, अलीगढ़ में एक मिनी औद्योगिक क्षेत्र और संत कबीरदास नगर एवं चंदौली में जनसुविधा केंद्रों की जल्द शुरुआत कर रही है। इसके अलावा फर्रुखाबाद और लखनऊ स्थित तालकटोरा में औद्योगिक बुनियादी ढांचे में सुधार कार्य भी शुरू किया जाएगा। इसके अलावा सरकार ने युवा स्वरोजगार योजना की लागत 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 01 करोड़ रुपये करने का पहल की है।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश का निर्यात अगले दो वर्षों में 02 लाख करोड़ रुपये और पाँच वर्षों में दोगुना करके 03 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है। एजेंडे में वर्णित विभाग के अन्य लक्ष्यों के अनुसार प्रदेश में छह एमएसएमई पार्क स्थापित करना, कानपुर में मेगा लेदर क्लस्टर स्थापित करना और बैंकों के सहयोग से एमएसएमई क्षेत्र के ऋण वितरण को बढ़ाकर पांच लाख करोड़ रुपये करना शामिल है। इससे प्रदेश में रोजगार के पांच करोड़ अवसरों के सृजन का मार्ग प्रशस्त होगा।
यहां यह उल्लेखनीय है कि पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश के निर्यात में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुयी है, जो 2017-18 में 88,967 करोड़ रुपये से बढ़कर 2021-22 (जनवरी 2022 तक) में 125,903.76 करोड़ हो गया है। इस साल के अंत तक इसके डेढ़ लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस बीच, विभाग का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत पांच लाख और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत 1.5 लाख कारीगरों को टूल किट वितरण करना और ऋण की सुविधा देना है। इसके अलावा, विभाग ने अगले पांच वर्षों में 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने और ओडीओपी उत्पादों की बिक्री दोगुनी करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

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