पिछले 3 दशकों से राजेंद्र कुमार लगा रहे हैं निशुल्क पानी की प्याऊ ताकि राहगीर गर्मी के मौसम में कर सकें गला तर

गुडग़ांव, 16 अप्रैल (अशोक): लोगों की इच्छा रहती है कि भीषण गर्मी में
राहगीरों को पीने के लिए थोड़ा जल मिल जाए ताकि उनका गला तर हो सके।
मार्च माह में ही तापमान बढऩा शुरु हो गया था और अप्रैल माह में भीषण
गर्मी पड़ रही है। जलदान अन्य सभी दानों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
बिना जल के सेवन के लिए कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता। गर्मी के मौसम
में प्याऊ लगाने का प्रचलन प्राचीन काल से हमारे देश में चला आ रहा है
लेकिन आधुनिकता के इस दौर व बदलते परिवेश में प्याऊ सिस्टम एक प्रकार से
खत्म ही हो गया है, लेकिन इस जनहित के कार्य को पिछले 3 दशकों से ग्रामीण
क्षेत्र परिवेश में पले-बढ़े राजेंद्र कुमार आज भी बखूवी निभाते आ रहे
हैं। वह शहर के विभिन्न क्षेत्रों में दर्जनों पानी के मटकों में जल भरकर
गर्मी में राहगीरों की प्यास बुझाने में लगे हैं। हालांकि राजेंद्र कुमार
जिला उपायुक्त कार्यालय में कार्यरत हैं। कार्यालय में आने से पूर्व
विभिन्न क्षेत्रों में लगाई गई प्याऊ पर मटकों में पानी भरकर अपने काम पर
आते हैं और सायं को भी घर जाते समय प्याऊ की व्यवस्था को देखकर ही जाते
हैं। उनका कहना है कि जलसेवा का कार्य एक पुण्य का कार्य है। इस कार्य
में वे पिछले कई दशकों से लगे हैं। कुछ वर्षों पूर्व तक शहर के विभिन्न
क्षेत्रों में प्याऊ की व्यवस्था वह करते थे। लेकिन अब यह थोड़ा क्षेत्र
सिमट गया है। जिला अदालत व मिनी सचिवालय क्षेत्र स्थित सडक़ किनारे फुटपाथ
पर प्याऊ की व्यवस्था की गई है। मटकों व जल की व्यवस्था राजेंद्र अपने
खर्च पर ही करते हैं। साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। उनका कहना है
कि इस कार्य से उन्हें बड़ी आत्मिक शांति मिलती है। उनका कहना है कि
ग्रामीण व आस-पास के क्षेत्रों से लोग बड़ी संख्या में अपने काम के लिए
गुडग़ांव शहर आते हैं। भीषण गर्मी में उन्हें पानी की जरुरत होती है। हर
कोई पेयजल खरीदकर नहीं पी सकता। इसलिए उन्होंने निशुल्क प्याऊ की
व्यवस्था की हुई है ताकि गर्मी के इस मौसम में राहगीर शीतल जल से अपना
गला तर कर सकें। पर्यावरण को संतुलित रखने व बढ़ते प्रदूषण से शहरवासियों
को बचाने के लिए बारिश के मौसम में वह पौधारोपण कार्यक्रमों का अपने
खर्चे पर आयोजन भी करते रहे हैं। जिले के कई राजकीय स्कूलों में उन्होंने
पौधारोपण भी शिक्षकों व छात्रों की सहायता से किया है। रोपित किए गए
पौधों की सुरक्षा के लिए भी वह छात्रों व क्षेत्रवासियों को जागरुक करते
हैं ताकि पौधे वृक्ष का रुप धारण कर सकें और शहरवासियों को प्रदूषण से
राहत भी मिल सके। पर्यावरण के प्रति ग्रामीणों व क्षेत्रवासियों को भी
जागरुक करते हैं।




