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नवरात्रि में बोए जाने वाले जौ के रंग से मिलते हैं ये खास संकेत

सनातन धर्म के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के समय ही जौ बोने की भी परंपरा है। मान्यता है कि कलश स्थापना के साथ जौ बोने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं। वहीं शास्त्रों में जौ के रंग का भी बड़ा महत्व बताया गया है।

सनातन धर्म में शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्रि बहुत खास होता है। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है। वहीं नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का भी बड़ा महत्व होता है जिसके साथ ही एक मिट्टी के पात्र में जौ के दाने बोए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के पहले दिन जौ बोए बिना मां दुर्गा की पूजा अधूरी रहती है। वहीं जौ बोने के बाद बढ़ने पर इसकी लंबाई और रंगों से भी विभिन्न धार्मिक मत जुड़े हुए हैं। तो आइए जानते हैं कि नवरात्रि में बोए जाने वाले जौ के रंग क्या संकेत देते हैं…

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा-पाठ, हवन आदि मांगलिक कार्यों में जौ को बहुत शुभ माना जाता है। वहीं मान्यता है कि इस संसार की पहली फसल यानी जौ ब्रह्मा के सामान है। इस कारण इसे पूजनीय माना गया है। वहीं अम्बे मां की आराधना के पर्व नवरात्रि के पहले दिन भी घरों में जौ बोकर घटस्थापना की जाती है। मान्यता है कि इससे मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जौ बोने के बाद यदि ये जल्दी उगने लगे और इसका रंग हरा अथवा पीला हो तो यह काफी शुभ होता है।

इसे आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा के साथ ही जीवन में आने वाली बाधाओं के नष्ट होने का संकेत माना जाता है। इसके अलावा यदि उगने वाली जौ दो रंगों सफेद और हरे रंग की होकर तेजी से बढ़ती है तो माना जाता है कि मां दुर्गा आपकी पूजा से प्रसन्न हैं।

लेकिन ज्योतिष अनुसार अगर आपके द्वारा बोई हुई जौ ठीक से नहीं बढ़ रही है और सूखकर झड़ने लगे तो इसे शुभ नहीं माना जाता है। ऐसी जौ आपके जीवन में परेशानी और नकारात्मक ऊर्जा का संकेत देती है। ऐसे मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए सच्चे मन से पूजा-प्रार्थना करें।

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