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ड्रग माफिया को लेकर CM योगी ने लिया सख्त एक्शन, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को दिए निर्देश

उत्तर प्रदेश में ड्रग माफिया पर शिकंजा कसने की रफ्तार तेज हो रही है। इसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ सख्त हो गए है। उन्होंने ने प्रशासन को मादक पदार्थ तस्करों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए है।

लखनऊः उत्तर प्रदेश में ड्रग माफिया पर शिकंजा कसने की रफ्तार तेज हो रही है। इसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ सख्त हो गए है। उन्होंने ने प्रशासन को मादक पदार्थ तस्करों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए है। उनके इन निर्देशों के बाद प्रशासन और भी ज्यादा चौकन्ना हो गया है। प्रशासन के राज्य के हर जिले में तस्करों पर नजर रखने के लिए भारी पुलिस फोर्स तैनात कर रखी है।

बता दें कि राज्य में नशा तस्करों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। जिन पर नकेल कसना बहुत जरुरी है। इसी संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नशा तस्करों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। उनके आदेशों पर मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई का दायरा बढ़ रहा है। नेपाल से लेकर पड़ोसी राज्यों की सीमा पर चौकसी बढ़ाई जाने के साथ ही पुलिस डार्क वेब के जरिए मेथाडोन ड्रग्स (सिंथेटिक ड्रग्स) की बढ़ती तस्करी पर भी शिकंजा कसेगी। इसके लिए भारी पुलिस बल तैनात है। वहीं, मादक पदार्थ व अवैध शराब तस्करों की कमर तोड़ने के लिए नवगठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ( ANTF) को डार्क वेब के माध्यम से मेथाडोन ड्रग्स की सप्लाई के चेन तक पहुंचने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

ANTF के अधिकारी नए तरीके से करेंगे काम
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के सहयोग से एएनटीएफ के अधिकारियों को नशे के इस काले कारोबार के बदलते तरीकों की जानकारी दिलाई जाएगी। पुलिस आइटी विशेषज्ञों की मदद से डार्क वेब पर चल रही ऐसी गतिविधियों पर नजर रखेगी। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ व एनसीबी ने बीते वर्ष पहली बार दो किलो से अधिक मेथाड्रोन ड्रग (एमडी) पकड़ी थी। डीआरआइ ने भी दिल्ली व नोएडा में कई स्थानों में छापेमारी के दौरान मादक पदार्थों के साथ मेथाड्रोन ड्रग्स भी बरामद किए थे। इसके बाद ही जांच एजेंसियों को पता चला था कि राज्य में मेथाड्रोन ड्रग्स की सप्लाई सड़क व रेल मार्ग के अलावा कूरियर के जरिए भी की जा रही है। इतना ही नहीं, तस्कर डार्क वेब पर सक्रिय हैं और युवाओं को अगल-अलग माध्यमों से यह जहर उपलब्ध करा रहे हैं, जिसकी कीमत क्रिप्टो करेंसी में वसूली जाती है।

प्रदेश में नशा तस्करों ने जमाई अपनी जड़े
बता दें कि करीब दो वर्ष पहले दिल्ली में एक अफ्रीकी नागरिक बड़ी मात्रा में मेथाड्रोन ड्रग के साथ पकड़ा गया था, जिससे पूछताछ में एनसीआर क्षेत्र में इस ड्रग की सप्लाई की बात भी सामने आई थी। साफ है कि प्रदेश में किस तरह नशे का यह कारोबार अपनी जड़ें जमा रहा है। यही वजह है कि एएनटीएफ को इस चुनौती से निपटने के लिए भी तैयार किए जाने का निर्णय किया गया है। एएनटीएफ में साइबर व साफ्टवेयर विशेषज्ञों को भी जोड़े जाने की तैयारी है।

मेथाड्रोन ड्रग के तस्करों पर पुलिस रखेगी नजर
वहीं, व्हाइट मैजिक और म्याउं-म्याउं मेथाड्रोन ड्रग को मेफेड्रोन, मिथाइलमेथ कैथिनोन व एमएमसी के नाम से जाना जाता है। जो एम्फैटेमिन व कैथिनोन वार्गों की एक सिंथेटिक उत्तेजक दवा हैं। आम बोलचाल में इन्हें ड्रोन, म्याउं-म्याउं, एम-कैट व व्हाइट मैजिक भी कहा जाता है। पुलिस इस मेथाड्रोन ड्रग की तस्करी करने वालों पर कड़ी नजर रखेगी।

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