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आईएएस अभिषेक प्रकाश को मिली नई जिम्मेदारी, बाबा रामदेव ने मैनपुरी से साधा अमेरिका पर निशाना

लखनऊ/मैनपुरी। उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक गलियारों और सामाजिक मंचों से आज दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक ओर जहां भ्रष्टाचार के आरोपों में लंबे समय तक सस्पेंशन झेलने वाले आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को शासन ने नई तैनाती दे दी है, वहीं दूसरी ओर मैनपुरी पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित ‘एप्स्टीन फाइल्स’ को लेकर तीखा बयान दिया है।

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे आईएएस अभिषेक प्रकाश अब सामान्य प्रशासन के सचिव

योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों में करीब एक साल तक निलंबित रहे आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बहाल करने के तीन दिन बाद नई पोस्टिंग दे दी है। उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभिषेक प्रकाश पर आरोप था कि उन्होंने अपने करीबी कर्मचारी निकांत जैन के माध्यम से एक सोलर इंडस्ट्री प्रोजेक्ट की मंजूरी के बदले बिजनेसमैन विश्वजीत दत्ता से एक करोड़ रुपये का कमीशन मांगा था। रिश्वत न मिलने पर फाइल रोकने की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची थी, जिसके बाद एसटीएफ की जांच के आधार पर उन पर कार्रवाई की गई थी।

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब 10 फरवरी को लखनऊ हाईकोर्ट में संबंधित बिजनेसमैन अपने आरोपों से मुकर गए और इसे एक ‘गलतफहमी’ करार दिया। कोर्ट द्वारा मामला रद्द किए जाने के बाद सरकार ने उनकी बहाली और नई तैनाती का रास्ता साफ कर दिया है।

मैनपुरी में बोले बाबा रामदेव: अमेरिका के ‘टापू कांड’ ने खोली बड़े चेहरों की पोल

मैनपुरी के एसआरआरडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे बाबा रामदेव ने वैश्विक नैतिकता पर बड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने अमेरिका की चर्चित ‘एप्स्टीन फाइल्स’ का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां दुराचार के लिए एक विशेष टापू बनाया गया था, जहां दुनिया के कई प्रभावशाली नेता और दिग्गज हस्तियां शामिल होती थीं।

बाबा रामदेव ने भारतीय शिक्षा और संस्कृति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पश्चिमी सभ्यता के इन ‘गंदे खेलों’ के विपरीत भारतीय संस्कार ही समाज को सही दिशा दे सकते हैं। उन्होंने एप्स्टीन केस को उदाहरण के रूप में पेश करते हुए कहा कि शक्तिशाली देशों के कई बड़े चेहरों के नाम इस अनैतिक कांड में शामिल रहे हैं, जो पूरी मानवता के लिए शर्मनाक है।

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