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बाराबंकी: चंद्रशेखर आजाद की सभा में पिस्टल लेकर मंच के करीब पहुंचा युवक, सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ा

बाराबंकी। बाराबंकी के बडेल मैदान में आयोजित आजाद समाज पार्टी के स्थापना दिवस और मान्यवर कांशीराम की जयंती समारोह के दौरान उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक पिस्टल लगाकर सांसद चंद्रशेखर आजाद के बेहद करीब पहुंच गया। जिस समय यह घटना हुई, चंद्रशेखर मंच से जनसभा को संबोधित कर रहे थे और युवक उनसे महज 10 कदम की दूरी पर था। सुरक्षाकर्मियों ने संदिग्ध आचरण दिखने पर युवक को तुरंत दबोच लिया और मंच से दूर ले जाकर सभा से बाहर कर दिया।

पुलिसकर्मी निकला पिस्टल लेकर पहुंचा युवक

पकड़े गए युवक ने अपनी पहचान अमित कुमार के रूप में बताई और दावा किया कि वह पुलिस विभाग में सिपाही है और पुलिस लाइन में तैनात है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीओ सौरभ श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि उक्त सिपाही की ड्यूटी सादे कपड़ों में सुरक्षा घेरे के भीतर लगाई गई थी। गौरतलब है कि करणी सेना द्वारा चंद्रशेखर को बाराबंकी न आने की चेतावनी दिए जाने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और इसी सतर्कता के चलते युवक को संदिग्ध मानकर पूछताछ की गई।

जुल्म के खिलाफ नहीं झुकने का आह्वान

मंच से संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने ईरान के नेता अयातुल्ला खामेनेई का जिक्र करते हुए उन्हें बाराबंकी की मिट्टी से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह खामेनेई ने झुकने के बजाय शहादत का रास्ता चुना, उसी तरह वे भी किसी धमकी से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को डरने की जरूरत नहीं है और दावा किया कि 2027 के चुनाव में भाईचारे के दम पर उत्तर प्रदेश से वर्तमान सरकार को उखाड़ फेंकेंगे।

नगीना के इतिहास को दोहराने का दावा

सांसद ने अपने संसदीय क्षेत्र नगीना का उदाहरण देते हुए समर्थकों में जोश भरा। उन्होंने कहा कि जिस तरह नगीना की पांचों विधानसभा सीटों पर विरोधियों को शिकस्त दी गई, वही इतिहास अब पूरे प्रदेश में दोहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब से आजाद समाज पार्टी ने मजबूती से काम करना शुरू किया है, तभी से अन्य राजनीतिक दलों में महापुरुषों को अपना बताने की होड़ लग गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले दो दशकों में इन पार्टियों को कांशीराम साहब की याद क्यों नहीं आई।

महापुरुषों की विरासत पर तीखी प्रतिक्रिया

डॉ. अंबेडकर और कांशीराम को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान पर चंद्रशेखर ने साफ कहा कि महापुरुष किसी एक जाति या दल की जागीर नहीं होते। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी की सक्रियता के कारण ही आज अन्य दल इन महापुरुषों के सम्मान की बात करने को मजबूर हुए हैं। कार्यक्रम में भारी संख्या में जुटे समर्थकों ने पार्टी के छठे स्थापना दिवस पर संकल्प लिया कि वे सामाजिक न्याय की लड़ाई को गांवों तक ले जाएंगे।

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