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अलीगढ़: अजान और नमाज को लेकर बीजेपी सांसद सतीश गौतम का विवादित बयान, सियासी गलियारों में हलचल

अलीगढ़। अक्सर अपने तीखे और विवादित बयानों के चलते चर्चा में रहने वाले अलीगढ़ के भाजपा सांसद सतीश गौतम ने एक बार फिर अजान और नमाज को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिससे जिले की राजनीति गर्मा गई है। रविवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान सांसद ने एआईएमआईएम (AIMIM) की मांगों का विरोध करते हुए कहा कि वह नहीं जानते कि ‘रमजान या ईद क्या होता है’ और सार्वजनिक मैदानों में नमाज की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

सुबह 4 बजे की अजान पर उठाए सवाल

सांसद सतीश गौतम ने लाउडस्पीकर से होने वाली अजान पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सुबह चार बजे जब लोग चिल्लाते हैं, तो बच्चों की पढ़ाई और परीक्षाओं पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अजान के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग बंद होना चाहिए। सांसद के अनुसार, जब शहर में पहले से ही बड़ी ईदगाह मौजूद है, तो सार्वजनिक स्थानों या नुमाइश मैदान जैसे क्षेत्रों में नमाज की अनुमति देने का कोई औचित्य नहीं है।

‘क्या अब हमारी छाती पर चढ़ेंगे’

सांसद ने अल्पसंख्यक समुदाय को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का जिक्र करते हुए बेहद तल्ख लहजे में कहा कि सरकार की आवास, राशन और अन्य योजनाओं का सबसे ज्यादा फायदा इसी समुदाय को मिल रहा है। उन्होंने कहा, “सरकार मकान दे रही है, सिलेंडर दे रही है, आप किसी भी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में चले जाएं, वहां यही लोग नजर आएंगे। अब क्या ये हमारी छाती पर चढ़ेंगे?” सांसद का यह बयान उन मांगों के जवाब में आया है जिसमें ईद के अवसर पर नुमाइश मैदान में नमाज पढ़ने और पुष्पवर्षा करने की अनुमति मांगी गई थी।

विपक्ष ने साधा निशाना, निंदनीय बताया

सांसद के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने उन्हें आड़े हाथों लिया है। बसपा और अन्य दलों के नेताओं ने कहा कि सांसद सतीश गौतम समाज को बांटने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि अलीगढ़ हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब का केंद्र रहा है और ऐसे बयान समाज में नफरत घोलने का काम करते हैं। बसपा नेता सलमान शाहिद ने कहा कि चुनाव नजदीक आते देख सांसद इस तरह की भाषा का प्रयोग कर ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस अलर्ट

सांसद के बयान के बाद शहर में उपजे तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी कानून व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। फिलहाल, यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है, जहां लोग पक्ष और विपक्ष में अपनी राय रख रहे हैं।

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