बाल विवाह मुक्त भारत: शामली के रजाक नगर में गूंजा सामाजिक कुरीति के खिलाफ शंखनाद

शामली। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित “बाल विवाह मुक्त भारत” राष्ट्रीय अभियान के तहत जनपद शामली में जागरूकता की मशाल जलाई जा रही है। जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान के दिशा-निर्देशों पर ग्राम पंचायत रजाक नगर के आंगनबाड़ी केंद्र में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समुदाय के लोगों को बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से मिटाने का संकल्प दिलाया गया।

जिला प्रोबेशन अधिकारी मौहम्मद मुशफेकीन के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जूनियर हाई स्कूल की शिक्षिका श्रीमती प्रतिभा ने की। इस दौरान उपस्थित ग्रामीणों और सेवा प्रदाताओं को बाल विवाह के कानूनी और सामाजिक दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया।

कानूनी शिकंजा: जेल और जुर्माना दोनों
महिला कल्याण विभाग के जेंडर स्पेशलिस्ट श्री कुलदीप शर्मा ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका और 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह कानूनन अपराध है। उन्होंने चेतावनी देते हुए बताया:
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सजा का प्रावधान: बाल विवाह करने या कराने पर 02 वर्ष का कठोर कारावास या ₹1,00,000 जुर्माना (अथवा दोनों) हो सकता है।
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सहयोगियों पर भी गाज: विवाह कराने वाले पंडित, मौलवी, फोटोग्राफर, टेंट हाउस संचालक और बैंड पार्टी वालों के विरुद्ध भी FIR दर्ज की जाएगी।
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सूचना तंत्र: बाल विवाह की आशंका होने पर तुरंत 1098, 112 या 181 पर कॉल करें।
सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी
चाइल्ड हेल्पलाइन से दीपक कुमार ने सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बाल सेवा योजना और निराश्रित महिला पेंशन योजना के बारे में विस्तार से बताया, ताकि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी परिवार बच्चों की कम उम्र में शादी न करे।
सामूहिक शपथ और संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर आंगनवाड़ी कार्यकत्री श्रीमती चित्रा पुंडीर, श्रीमती रामरती, और श्रीमती कमलेश सहित समूह की महिलाओं ने शपथ ली कि वे न तो स्वयं बाल विवाह करेंगे और न ही समाज में होने देंगे। अधिकारियों ने बताया कि यह विशेष अभियान 8 मार्च 2026 तक निरंतर जारी रहेगा।



