मुजफ्फरनगर

भाकियू अराजनैतिक का आधिकारिक बयान: भारत-अमेरिका ट्रेड फ्रेमवर्क पर जल्दबाजी न करें, किसानों के हित सर्वोपरि

नई दिल्ली/लखनऊ। भारत और अमेरिका के बीच चल रहे अंतरिम ट्रेड डील और फ्रेमवर्क को लेकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि यह समझौता अभी द्विपक्षीय वार्ता के दौर में है और दस्तावेजों में लगातार बदलाव हो रहे हैं। इसलिए अंतिम डील से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना या विरोध करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 6 फरवरी के संयुक्त बयान के बाद 10 फरवरी को कई बड़े बदलाव हुए, जिनमें कृषि उत्पादों से दालों का नाम हटाना शामिल है।

यूनियन के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने बताया कि कुछ संगठन और विपक्षी दल किसानों के बीच भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और अपनी समझ के आधार पर निर्णय लें। हरिनाम सिंह वर्मा ने सरकार को चेतावनी दी कि व्यापार बाधाओं यानी ‘नॉन टैरिफ बैरियर’ के बिना कोई भी समझौता नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यही किसानों के संरक्षण का मुख्य हथियार है।

भाकियू अराजनैतिक ने डील के संभावित सकारात्मक पहलुओं को भी रेखांकित किया। अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना निर्यातकों के लिए राहत देगा। इससे पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बासमती चावल के किसान सीधे लाभान्वित होंगे। मसालों के निर्यात में दक्षिण भारत के किसानों को अवसर बढ़ेंगे और टेक्सटाइल क्षेत्र में भारत को बांग्लादेश के समकक्ष लाभ मिलने की संभावना है, जिससे कपास किसानों को फायदा होगा।

संगठन ने कुछ संवेदनशील आयात मुद्दों पर सतर्कता बरतने की सलाह दी। अमेरिका से पशु चारा (DDGs), लाल ज्वार, मेवे, ताजे फल और सोयाबीन तेल के आयात पर ध्यान देने की जरूरत है। धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि भारत पहले ही अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत खाद्य तेल अन्य देशों से आयात कर रहा है। उन्होंने कहा कि फलों और प्रीमियम उत्पादों का आयात केवल ऑफ-सीजन और न्यूनतम आयात दर पर ही होना चाहिए, ताकि घरेलू किसानों को नुकसान न पहुंचे।

भाकियू अराजनैतिक ने निष्कर्ष में कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक व्यवस्था धान उत्पादक और बड़े निर्यातक किसानों के लिए अवसर ला सकती है, लेकिन छोटे दलहन-तिलहन किसानों के लिए जोखिम भी बना सकती है। संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि MSP और आयात शुल्क जैसे नीतिगत संरक्षण को मजबूत रखा जाए और भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ किसी भी समझौते से बचा जाए।

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