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दक्षिण पूर्व रेलवे में ट्रैक मेंटेनरों की मौत पर यूनियन का फूटा गुस्सा, कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन

पश्चिमी सिंहभूम। दक्षिण पूर्व रेलवे जोन में ट्रैक मेंटेनरों की लगातार हो रही मौतों से आक्रोश गहराता जा रहा है। बीते छह महीनों में नौ कर्मचारियों ने अपने प्राण गंवाए हैं, फिर भी सुरक्षा इंतज़ाम जस के तस बने हुए हैं। हाल ही में रांची और खड़गपुर मंडल में दो अलग-अलग हादसों में दो ट्रैक मेंटेनरों की जान चली गई, जिसके बाद ऑल इंडिया रेलवे ट्रैक मेंटेनर यूनियन भड़क उठी है।

यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह चक्रधरपुर निवासी चांद मोहम्मद ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रैक मेंटेनरों की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल संवेदनहीनता दिखाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि रेलवे ने तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो यूनियन दक्षिण पूर्व रेलवे के जोनल कार्यालय के सामने एकदिवसीय धरने के साथ बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगी। चांद मोहम्मद ने यह भी कहा कि “हम जिंदगी दांव पर लगाकर रेलवे की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, लेकिन हमारी सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतज़ाम ही नहीं है।”

शनिवार को रांची मंडल के पीडब्ल्यूआई मुरी–1 खंड में तैनात ट्रैक मेंटेनर बिपत्तरानी महतो ड्यूटी के दौरान इलो स्टेशन के पास ट्रेन संख्या 18615 की चपेट में आ गए। नाइट कॉल वॉटर पेट्रोलिंग के दौरान हुई इस दुर्घटना में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसी दिन खड़गपुर मंडल के पीडब्ल्यूआई हिजली सेक्शन में नियुक्त ट्रैक मेंटेनर मंजूरुल हैदर सुबह 6:30 बजे कोल्ड वेदर पेट्रोलिंग करते समय हिजली–खड़गपुर मेमू (68048) की चपेट में आ गए और उनकी भी तत्काल मौत हो गई।

कर्मचारियों का कहना है कि कोहरे और ठंड के मौसम में ट्रेनें धीमी गति से चलती हैं, लेकिन उनकी पेट्रोलिंग दूरी कम नहीं की जाती, जिससे हादसों की संभावना बढ़ जाती है। ट्रैक मेंटेनरों ने सुरक्षा किट, बेहतर संचार साधन और पेट्रोलिंग मानकों में बदलाव की मांग की है।

लगातार हो रही मौतों ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बना दिया है और यूनियन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब और जान गंवाने नहीं दी जाएगी और सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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