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लद्दाख प्रशासन ने सोनम वांगचुक पर लगे उत्पीड़न के आरोपों को किया खारिज

लद्दाख प्रशासन ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक पर लगे “उत्पीड़न” या “विच-हंट” के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख प्रशासन ने एक प्रेस बयान जारी कर सोनम वागचुक सहित कुछ व्यक्तियों पर सरकारी एजेंसियों द्वारा उत्पीड़न किये जाने के निराधार आरोपों का खंडन करते हुए साफ कर दिया है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई विश्वसनीय सूचनाओं और दस्तावेजों पर आधारित है और उनसे निष्पक्ष रूप से जांच जारी रखने देने की अपील की।

प्रशासन का कहना है कि वांगचुक के खिलाफ की गई कार्रवाई विश्वसनीय साक्ष्यों और दस्तावेजों पर आधारित है, न कि किसी व्यक्तिगत दुर्भावना या साजिश पर।

बता दें कि सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था।

वांगचुक पर आरोप है कि उनके कथित भड़काऊ भाषणों (जैसे नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश के विद्रोहों और “अरब स्प्रिंग” का जिक्र) ने लेह में 24 सितंबर को हुई हिंसा को भड़काया।
बता दें कि इस हिंसा में चार लोगों की मौत गयी थी और 80 से अधिक घायल हुए थे।

हिरासत के आधार (grounds of detention) वांगचुक को प्रदान किए गए हैं। प्रशासन ने कहा कि सरकार ने 20 सितंबर को उच्च स्तरीय समिति के साथ बातचीत की तारीख तय की थी, लेकिन वांगचुक ने अनशन जारी रखा, जो “व्यक्तिगत और राजनीतिक लाभ” के लिए गैर-जिम्मेदाराना कदम था।

इस बीच प्रशासन ने अपील की कि कानूनी प्रक्रिया को बाधित न किया जाए और शांति बहाल की जाए।

उधर,  वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने आरोप लगाया कि यह एक “फैब्रिकेटेड नैरेटिव” है, जो छठी अनुसूची लागू करने से बचने के लिए बनाया गया। उन्होंने कहा कि वांगचुक को “एंटी-नेशनल” बताकर बदनाम किया जा रहा है, जबकि वे लद्दाख की संस्कृति, पर्यावरण और शिक्षा के लिए काम करते रहे हैं।

वांगचुक ने खुद कहा कि वे गिरफ्तारी से नहीं डरते, लेकिन यह लद्दाख में और अशांति पैदा कर सकता है। वे जम्मू-कश्मीर से अलग UT बनने के बाद लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग कर रहे थे।

कौन हैं सोनम वागचुक

सोनम वांगचुक (59 वर्ष) एक प्रसिद्ध कार्यकर्ता हैं, जिन्हें 2018 में रेमन मैगसेसे पुरस्कार मिला। वे SECMOL के संस्थापक हैं और ‘3 इडियट्स’ फिल्म में प्रेरणा स्रोत थे। हाल के आंदोलन में उन्होंने अनशन किया, लेकिन हिंसा भड़कने पर वे “चुपके से” भाग गए, जैसा प्रशासन का दावा है।

लेह अपोलो सोसाइटी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) ने 6 अक्टूबर को निर्धारित बातचीत के लिए वांगचुक की रिहाई की शर्त रखी है। हिंसा की न्यायिक जांच की मांग भी हो रही है।

वांगचुक के बारे में पुलिस का कहना है कि उनके खिलाफ पाकिस्तान और बांग्लादेश दौरे व विदेशी फंडिंग की भी जांच चल रही है।

क्या है वांगचुक की मांग

यह विवाद लद्दाख की राजनीतिक मांगों से जुड़ा है, जहां स्थानीय लोग अपनी पहचान, संस्कृति और संसाधनों की रक्षा चाहते हैं।

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