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राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी के बाद अधिनियम बना राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंजूरी मिलने के साथ ही राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक अधिनियम बन गया है। इस विधेयक में भारत के खेल प्रशासन में व्यापक स्तर पर सुधार का वादा किया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंजूरी मिलने के साथ ही राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक अधिनियम बन गया है। इस विधेयक में भारत के खेल प्रशासन में व्यापक स्तर पर सुधार का वादा किया गया है।

केंद्र सरकार द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना में कहा गया है कि राष्ट्रपति की मंजूरी सोमवार को मिल गई।

इसमें कहा गया है, ‘‘संसद के निम्नलिखित अधिनियम को 18 अगस्त, 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई और इसे सामान्य जानकारी के लिए प्रकाशित किया जाता है – राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025।’’

जैसा कि पीटीआई ने पहले बताया था कि मूल विधेयक में दो प्रमुख संशोधन किए गए हैं।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे को सीमित कर केवल उन खेल निकायों को इसमें शामिल किया गया है जो सरकारी धन और सहायता पर निर्भर हैं। इस तरह से भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) को प्रभावी रूप से इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

क्रिकेट बोर्ड आरटीआई के दायरे में आने का विरोध कर रहा था क्योंकि वह सरकारी धन पर निर्भर नहीं है।

अधिनियम में कहा गया है, ‘‘किसी मान्यता प्राप्त खेल संगठन को, जो उप-धारा (1) के तहत केंद्र सरकार या राज्य सरकार से अनुदान या कोई अन्य वित्तीय सहायता प्राप्त करता है, ऐसे अनुदान या किसी अन्य वित्तीय सहायता के उपयोग के संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण माना जाएगा।’’

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय महासंघों में शीर्ष पदों के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को कार्यकारी समिति में केवल एक कार्यकाल पूरा करना होगा। पहले यह दो कार्यकाल था।

अधिनियम में कहा गया है, ‘‘कोई व्यक्ति तब तक अध्यक्ष, महासचिव या कोषाध्यक्ष के पद के लिए चुनाव लड़ने या नामांकन करने के लिए योग्य नहीं होगा, जब तक कि वह व्यक्ति उत्कृष्ट योग्यता वाला खिलाड़ी न हो या उसने पहले राष्ट्रीय खेल निकाय की कार्यकारी समिति में कम से कम एक पूर्ण कार्यकाल के लिए सदस्य के रूप में या उसकी संबद्ध इकाई में अध्यक्ष, महासचिव या कोषाध्यक्ष के रूप में कार्य न किया हो।’’

खेल विधेयक एक दशक से अधिक समय से लंबित था। इसे पिछले एक वर्ष में विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद पारित किया गया।

इस विधेयक को 23 जुलाई को लोकसभा में पेश किया गया और 11 अगस्त को इसे वहां पारित कर दिया गया। इससे एक दिन बाद राज्यसभा ने दो घंटे से अधिक समय तक चली चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया था।

नया कानून न केवल प्रशासनिक मानदंड निर्धारित करता है, बल्कि इसमें विवादों के त्वरित समाधान के लिए राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण के गठन का भी प्रावधान है।

इसके अलावा, इसमें राष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल के गठन की भी बात कही गई है जो अक्सर विवादों में घिरे रहने वाले राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के चुनावों की निगरानी करेगा।

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