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वाराणसी में खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं गंगा, छतों पर की जा रही आरती; ऊंचे चबूतरे पर करने पड़े दाह

यूपी के वाराणसी में सोमवार सुबह गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया, जिससे घाटों पर जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया और दाह संस्कार व धार्मिक अनुष्ठान छतों तथा ऊंचे चबूतरे पर करने पड़े। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, सोमवार सुबह तक गंगा का जल स्तर 72.1 मीटर पर था, जो खतरे के निशान (71.262 मीटर) को पार कर गया। गंगा सेवा निधि के शिवम अग्रहरि ने बताया कि सभी घाट जलमग्न हो गए हैं, जिससे वहां तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

छतों पर की जा रही है गंगा आरती
दशाश्वमेध घाट पर प्रसिद्ध गंगा आरती अब छतों पर की जा रही है, जबकि मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाटों पर दाह संस्कार ऊंचे चबूतरों पर किए जा रहे हैं। जिले के अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर नदी में नावों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में गश्त कर रही हैं और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।

जिला मजिस्ट्रेट ने लिया जायजा 
रविवार को जिला मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने घरों की ऊपरी मंजिलों पर रह रहे परिवारों को भोजन और राहत किट उपलब्ध कराएं और राहत शिविरों का पूरी क्षमता से सुचारू संचालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को राहत और सुरक्षा प्रदान करने में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। शिविरों में पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती के आदेश दिए गए हैं। साथ ही शाम तक शिविरों में भोजन बनाने की व्यवस्था भी की जाएगी।

जिला मजिस्ट्रेट ने दिए ये भी निर्देश 
जिला मजिस्ट्रेट ने नगर निगम के अधिकारियों को शिविरों और शौचालयों के आसपास उचित सफ़ाई बनाए रखने और जलभराव वाले क्षेत्रों में लार्वा-रोधी छिड़काव करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सभी शिविरों में चिकित्सा दल तैनात करने और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने शिविरों में वैकल्पिक प्रकाश व्यवस्था के लिए जनरेटर लगाने और महिलाओं व बच्चों के लिए भोजन, दवाइयां, स्वच्छता और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के भी निर्देश दिए।

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