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निमिषा प्रिया के फांसी टलने की ‘सुप्रीम’ उम्मीदें खत्म, कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगी सरकार

निमिषा प्रिया को यमन में 16 जुलाई को फांसी होनी है, लेकिन उससे पहले भारत में निमिषा की फांसी की सजा को टालने के लिए मांग उठ रही है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की गई, जहां पर एडवोकेट जनरल (AG) ने सरकार की तरफ से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ‘भले ही इसे पब्लिक नहीं किया गया हो, लेकिन सरकार ने अपनी तरफ से निमिषा को फांसी से बचाने का हरसंभव कूटनीतिक प्रयास किया है।’ इसके अलावा, सरकार ने फांसी रुकवाने के मुद्दे पर भी अपना रुख साफ कर दिया है।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में निमिषा प्रिया के मामले में सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल (AG) शामिल हुए। उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि ‘यमन एक अलग तरह का देश है, लेकिन प्रयास अभी भी जारी हैं।’ AG ने कहा कि ‘ब्लड मनी पर से नेगोशिएशन एक प्राइवेट मैटर है, जिसमें सरकार की दखल नहीं हो सकती है।’ एडवोकेट जनरल ने कहा कि ‘अदालत ने इस मामले में ऑर्डर न पास करते हुए उम्मीद जताई कि सब सही होगा और निमिषा बच जाएगी।’ अब इस मामले पर अगली सुनवाई शुक्रवार को की जाएगी।

पीड़ित के परिवार को ऑफर किए पैसे

जानकारी के मुताबिक, निमिषा के परिवार वालों ने पीड़ित परिवार को 1 मिलियन डॉलर यानी 10 लाख रुपये का ऑफर दिया है। निमिषा के परिवार को उम्मीद है कि सरकार नेगोसिएशन को अंजाम तक पहुंचाने में यमन स्थित अपना दूतावास परिवार की मदद करे। नर्स निमिषा प्रिया भारत के केरल राज्य से ताल्लुक रखती है। 2008 में वह यमन गई थी, जहां पर उस पर एक कत्ल का इल्जाम लगा है।

दरअसल, निमिषा पर जिसकी हत्या का इल्जाम है, वह उसका  बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो मेहदी है। निमिषा पर आरोप लगा कि उसने मेहदी का कत्ल करके उसके शव के टुकड़े कर दिए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निमिषा ने अपना जुर्म पुलिस के सामने कुबूल भी कर लिया था।

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