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‘सभी सौदे रद्द करने’ की धमकी देकर भारत-पाक युद्ध को रुकवाया: ट्रंप का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपने उस दावे को फिर दोहराया कि उन्होंने अपने प्रशासन के अधिकारियों को भारत और पाकिस्तान के साथ हुए ‘सभी सौदे रद्द करने’ के लिए कहकर दोनों देशों के बीच युद्ध रुकवाया था।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘हमने भारत और पाकिस्तान के साथ कुछ बेहतरीन काम किए। शायद यह परमाणु हमले की दिशा में बढ़ रहा था। हमने बहुत काम किया। मुझे नहीं पता कि क्या कभी कोई ऐसा राष्ट्रपति हुआ है जिसने इससे ज़्यादा काम किया हो।’’

ट्रंप ने एक बार फिर अपना दावा दोहराया कि उन्होंने दोनों देशों से कहा था कि दिल्ली और इस्लामाबाद के साथ अमेरिका “व्यापार” नहीं करेगा और इस तरह से उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया था। उनके अनुसार यह परमाणु हमले में बदल सकता था।

ट्रंप ने कहा, “सर्बिया, कोसोवो में बहुत बड़ा युद्ध होने वाला था। मैंने कहा कि आप भी युद्ध करें, अमेरिका के साथ कोई व्यापार नहीं होगा।… यही भारत और पाकिस्तान के साथ हुआ। मैं उन दोनों के साथ बातचीत कर रहा था और मैंने (वित्त मंत्री) स्कॉट (बेसेंट) से कहा, मैंने (वाणिज्य मंत्री) हॉवर्ड (लुटनिक) से कहा कि भारत और पाकिस्तान के साथ सभी सौदे रद्द कर दें। वे हमारे साथ व्यापार नहीं कर रहे क्योंकि वे युद्ध कर रहे हैं।’’

ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों ने ‘‘हमें कॉल किया और कहा कि ‘हम क्या करें?’ मैंने कहा, ‘देखिए आप अमेरिका के साथ व्यापार करना चाहते हैं। यह बहुत बढ़िया है, लेकिन आप एक दूसरे पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करना चाहते हैं। हम ऐसा नहीं होने देंगे।’’

ट्रंप ने कहा कि और वे दोनों सहमत हुए दोनों के पास अच्छे नेता हैं, इसलिए हमने बहुत कुछ किया।

उन्होंने कहा कि ‘‘भारत जैसे कुछ बड़े देश के साथ मुझे लगता है कि हम एक समझौते पर पहुंचने जा रहे हैं, जिसके तहत हमें वहां जाकर व्यापार करने का अधिकार होगा। अभी यह प्रतिबंधित है। आप वहां जा नहीं जा सकते। आप इसके बारे में सोच भी नहीं सकते। हम पूरी तरह से व्यापार अवरोध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।’’

ट्रंप ने चीन के साथ भी व्यापार होने की बात कही।

ट्रंप ने कई बार दोहराया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई बंद कराने में मदद की है।

हालाकि, भारत लगातार यह कहता रहा है कि पाकिस्तान के साथ संघर्ष समाप्त करने पर सहमति दोनों सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों के बीच सीधी बातचीत के बाद बनी थी।

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