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‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या, नियुक्ति प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट को देना होगा ध्यान’, कपिल सिब्बल का बड़ा बयान

वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि यह वर्षों से जारी है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है। यह कोई पहली बार नहीं है कि देश के वरिष्ठ परिषदों और वकीलों ने इस मुद्दे को उठाया हो। यह कई सालों से चल रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सर्वोच्च न्यायालय को न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में आने वाले मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि भ्रष्टाचार केवल न्यायपालिका में ही नहीं बल्कि समाज में भी एक मुद्दा बना हुआ है।

सिब्बल ने कहा कि अब समय आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर गौर करना शुरू करे कि नियुक्ति प्रक्रिया कैसे होती है। नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सावधानीपूर्वक होनी चाहिए। भ्रष्टाचार भी समाज में एक बहुत गंभीर मुद्दा है और प्रधानमंत्री ने जो कहा है उसके बावजूद भ्रष्टाचार बढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की उस टिप्पणी की भी आलोचना की जिसमें कहा गया था कि “स्तन पकड़ना, पायजामे का नाड़ा तोड़ना बलात्कार का अपराध नहीं है”।

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के यहां स्थित आधिकारिक आवास से कथित रूप से बड़ी नकद राशि बरामद होने की घटना के बाद, उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना की अगुवाई वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने कथित घटना के बाद तत्काल एक बैठक की और न्यायमूर्ति वर्मा को दिल्ली उच्च न्यायालय से स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया। न्यायमूर्ति वर्मा का प्रस्तावित स्थानांतरण केंद्र द्वारा कॉलेजियम की सिफारिश को स्वीकार करने के बाद प्रभावी हो सकता है।

 

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