Haryana

आकाश आनंद ने हरियाणा में संभाली बसपा की कमान, कुमारी शैलजा को दिया न्योता

उनका उद्देश्य हरियाणा में बसपा को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना है।

आकाश आनंद जो बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक हैं, हरियाणा विधानसभा चुनावों में पार्टी के अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। मायावती के आशीर्वाद से उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली है, और हरियाणा में कई चुनावी रैलियों को संबोधित कर चुके हैं। उनका उद्देश्य हरियाणा में बसपा को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना है। इसके तहत उन्होंने कांग्रेस की वरिष्ठ दलित नेता कुमारी शैलजा को भी बसपा में शामिल होने का न्योता दिया है, जो कांग्रेस में हो रहे अपमान के कारण असंतुष्ट चल रही हैं।

आकाश आनंद ने पिछले एक साल में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। दिसंबर 2023 में मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी नामित किया था। हालांकि, इसके कुछ समय बाद ही उन्हें “अपरिपक्व” कहकर पद से हटा दिया गया था। लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद मायावती ने उन्हें फिर से पार्टी की मुख्य जिम्मेदारियों पर बहाल कर दिया। अब, हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए उन्हें स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतारा गया है। स्टार प्रचारकों की सूची में आकाश का नाम मायावती और उनके पिता आनंद कुमार के बाद तीसरे स्थान पर है, जो उनके बढ़ते कद को दर्शाता है।

हरियाणा विधानसभा चुनाव में बसपा ने इनेलो के साथ गठबंधन किया है। जुलाई 2024 में इस गठबंधन का ऐलान हुआ था, जिसके तहत 90 सीटों में से इनेलो 53 सीटों पर और बसपा 37 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। गठबंधन की ओर से अभय चौटाला को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया गया है। आकाश आनंद को इस गठबंधन के समन्वय का भी श्रेय दिया जाता है, जिसमें मायावती ने उन्हें प्रमुख भूमिका सौंपी थी।

आकाश के नेतृत्व में बसपा हरियाणा में अपना जनाधार बढ़ाने और दलित वोट बैंक को मजबूती से साधने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने आकाश की छवि को युवाओं और दलितों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए कई रणनीतियां अपनाई हैं, जिनमें उनकी सक्रिय रैलियां और सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी शामिल है।

हरियाणा चुनाव के बाद आकाश आनंद की जिम्मेदारी और बढ़ने की संभावना है। बसपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल के अनुसार, आकाश को हरियाणा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में 10 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इससे स्पष्ट है कि मायावती उन्हें बसपा के प्रमुख चेहरों में से एक बनाना चाहती हैं।

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