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खूंखार भेड़िये का एक और हमला, 6 साल की मासूम घायल

उत्तर प्रदेश के बहराइच में पिछले डेढ़ महीने से शुरू हुआ भेड़ियों का आतंक थमने का नाम ही नहीं ले रहा। खूंखार भेड़िए लगातार हमले कर मासूमों को अपना शिकार बना रहे है

उत्तर प्रदेश के बहराइच में पिछले डेढ़ महीने से शुरू हुआ भेड़ियों का आतंक थमने का नाम ही नहीं ले रहा। खूंखार भेड़िए लगातार हमले कर मासूमों को अपना शिकार बना रहे है। इसी बीच भेड़िए ने सोमवार देर रात एक और हमला कर दिया। इस हमले से 6 साल की एक बच्ची घायल हो गई। बच्ची को इलाज के लिए सीएचसी महसी भेजा गया है। वन विभाग भी लगातार खूंखार भेड़ियों की तलाश में जुटा हुआ है, लेकिन अभी तक पकड़ने में नाकाम है।

बता दें कि आदमखोर भेड़ियों ने जिले के गिरधरपुर पंढवा गांव में 6 साल की मासूम अफसाना पर हमला कर दिया। मासूम अफसाना अपनी दादी के साथ सो रही थी, तभी दबे पांव भेड़िया घर के अंदर दाखिल हुआ और हमला कर दिया, लेकिन दादी की नींद खुल गई और उन्होंने शोर मचा दिया। जिसके बाद भेड़िया वहां से भाग गया। जख्मी बच्ची को इलाज के लिए सीएचसी में भर्ती कराया गया। डॉक्टर के मुताबिक, उसकी हालत अभी ठीक है, इलाज चल रहा है। बच्ची पर हमला करने के बाद भेड़िया पड़ोस के घर में भी हमला करने की फिराक में था, लेकिन  गांव वालों की पहरेदारी की वजह से उसे मौका नहीं मिला।

इससे पहले भी रविवार की रात को भी भेड़िए ने खूनी खेल खेला और हरदी थाना क्षेत्र में ग्राम पंचायत गरेठी गुरदत्त सिंह के मजरा नववन गरेथी में मां के साथ कमरे में सो रही अंजली (2) पर भोर पहर लगभग 4 बजे हमला किया। भेड़िया मां मीनू के साथ लेटी अंजली को दबोच कर गन्ने की ओर भागा। शोर सुनकर मां मीनू की आंख खुली और उसने शोर मचाते हुए पीछा किया। लेकिन, भेड़िया बच्ची को लेकर भाग निकला। इस हमले की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम पहुंची और ड्रोन कैमरे से तलाश करनी शुरू की। तभी गांव से एक किमी की दूरी पर बालिका का शव पड़ा मिला।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मानव और वन्य जीव संघर्ष की दृष्टि से संवेदनशील जनपदों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार हर नागरिक के जीवन की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे जिले जो कि वन्य जीवों की दृष्टि से संवेदनशील हैं वहां सुरक्षा के सभी इंतज़ाम किए जाएं। वहीं, वन विभाग भी भेड़िए को पकड़ने के लिए बनाई गई रणनीति के तहत लगातार प्रयास कर रहा है। वन विभाग बच्चों की मूत्र में भिगोई गई रंग-बिरंगी गुड़ियों का इस्तेमाल कर रहा है। इन ‘टेडी डॉल’ को दिखावटी चारे के रूप में नदी के किनारे भेड़ियों के आराम स्थल और मांद के पास लगाया गया है। ‘टेडी डॉल’ को बच्चों की पेशाब से भिगोया गया है, ताकि इनसे बच्चों जैसी गंध आए और भेड़िये इनकी तरफ खींचे चले आएं।

 

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