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शिव महापुराण में दंडी स्वामी सत्यदेव आश्रम जी ने जालंधर कथा का वर्णन किया

अग्रसेन भवन में चल रही शिव महापुराण कथा में दंडी स्वामी जी ने बताया एक बार बृहस्पति देव और देवराज इंद्र भगवान शिव से मिलने के लिए कैलाश पर गए।

अग्रसेन भवन में चल रही शिव महापुराण कथा में दंडी स्वामी जी ने बताया एक बार बृहस्पति देव और देवराज इंद्र भगवान शिव से मिलने के लिए कैलाश पर गए। देवराज इंद्र को लगा कि मैं देवताओं का राजा हूं और भगवान शिव ने मुझे यथोचित सम्मान नहीं दिया है। जिससे वह नाराज हो गए और इंद्र ने शिव का अपमान कर दिया इससे शिव क्रोधित हो तांडव की मुद्रा में आ गए इंद्र घबराकर भाग गए। देवलोक में हाहाकार मच गया शिव के तीसरे नेत्र से प्रचंड ज्वाला के साथ अग्नि प्रकट हुई इसके तेज से बालक ने जन्म लिया इस बालक को सागर की लहरों पर आश्रय मिला यही जालंधर कहलाया शिव का अंश होने के कारण अत्यंत बलवान शक्तिशाली हुआ। इसकी पत्नी का नाम वृंदा था जो अत्यंत पतिव्रता थी इसकी शक्ति का बड़ा कारण वृंदा थी उसको वरदान था उसके धर्म परायण रहते कोई उसके पति का वध नहीं कर पाएगा जिसके कारण जालंधर ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया कोई भी देव ऐसा नहीं बचा जो जालंधर का सामना कर सके एक बार जालंधर पार्वती जी पीछे पड़ गया। तब पार्वती जी ने अंतर ध्यान होकर अपने को बचाया और उन्होंने भगवान विष्णु से प्रार्थना करी कि आप सृष्टि के उद्धार के लिए लीला करें जिससे कि जालंधर का वध हो सके तब वृंदा का सतीत्व भंग हुआ इसके बाद भगवान शिव एवं जालंधर में भयंकर युद्ध हुआ शिव ने जालंधर को मारकर तीनों लोको को अभय प्रदान किया डॉ दीपक गौतम सचिव ने बताया। आज का शिव पुराण पूजन आरती राजीव पालीवाल जी के परिवार द्वारा की गई। कथा सुनने वालों में डॉ मल्होत्रा डॉक्टर अखिलेश शर्मा कृष्ण पाल राम कुमार राजेंद्र शर्मा हरिशंकर अग्रवाल पिंटू अग्रवाल मोनिका रेखा उमा रितु आदि रहे।

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