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हमला करने के बाद ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी, कहा- हूती विद्रोहियों को समर्थन देना बंद करो

अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद यमन में हूती विद्रोहियों पर हवाई हमले किए जिसमें 24 लोगों की मौत हो गई। यह हमले लाल सागर में जहाजों पर हो रहे हमलों के खिलाफ की गई कार्रवाई का हिस्सा थे। ट्रंप ने हूती विद्रोहियों के मुख्य समर्थक ईरान को भी चेतावनी दी कि वह इन विद्रोहियों को समर्थन देना तुरंत बंद कर दे। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने अमेरिका को धमकी दी तो हम पूरी तरह से जवाब देंगे और फिर हम नरम नहीं होंगे।

ट्रंप का आदेश और हमले

शनिवार को ट्रंप ने अपने अधिकारियों को यमन की राजधानी सना पर हवाई हमले करने का आदेश दिया। ट्रंप ने यह भी कहा कि जब तक ईरान समर्थित हूती विद्रोही समुद्री रास्तों पर जहाजों पर हमले बंद नहीं करेंगे तब तक वे “अत्यधिक घातक बल” का इस्तेमाल करेंगे।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमारे बहादुर सैनिक अभी अमेरिकी शिपिंग, वायु और नौसैनिक संपत्तियों की रक्षा करने के लिए आतंकवादियों के ठिकानों और मिसाइल सुरक्षा पर हवाई हमले कर रहे हैं ताकि नौवहन स्वतंत्रता को बहाल किया जा सके।” उन्होंने हूती विद्रोहियों से कहा कि उनका समय समाप्त हो गया है और उन्हें तुरंत हमले बंद करने होंगे। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें भारी सजा मिलेगी।

ट्रंप ने कहा, “कोई भी आतंकवादी ताकत अमेरिकी और अन्य देशों के वाणिज्यिक और नौसैनिक जहाजों को जलमार्गों पर स्वतंत्र रूप से चलने से नहीं रोक सकती।” उन्होंने ईरान को भी चेतावनी दी कि वह हूती विद्रोहियों को समर्थन देना बंद कर दे और वादा किया कि वह ईरान को इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराएंगे।

 

हूती विद्रोहियों का हमला और नुकसान

वहीं शनिवार शाम को हूती विद्रोहियों ने अपने इलाके में सिलसिलेवार विस्फोटों की जानकारी दी। सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में सना हवाई अड्डे के ऊपर काले धुएं के गुबार दिखाई दे रहे थे जिसमें एक बड़ी सैन्य सुविधा भी जलती हुई दिखाई दी। हालांकि नुकसान की सही जानकारी अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।

कुछ दिन पहले ही हूती ने कहा था कि वे गाजा पर इजरायल की नाकेबंदी के जवाब में यमन के तटवर्ती जलक्षेत्र में इस्राइली जहाजों पर हमले फिर से शुरू करेंगे। हालांकि अब तक हूती की ओर से कोई नया हमला नहीं हुआ है।

अमेरिका, इजरायल और ब्रिटेन की कार्रवाई 

संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और ब्रिटेन ने पहले भी यमन में हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों पर हमले किए हैं। इजरायल की सेना ने इस हमले पर कोई टिप्पणी नहीं की। ट्रंप ने कहा, “इन लगातार हमलों से अमेरिका और पूरी विश्व अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है और निर्दोष लोगों की जान भी जोखिम में पड़ी है।”

अंत में कहा जा सकता है कि यह हमले और कार्रवाई यमन में जारी संघर्ष को और भी बढ़ा सकते हैं और अमेरिका का यह कदम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

 

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