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सीएचसी अजीतमल का वाटर एटीएम ठप, स्वच्छ पानी के लिए परेशान मरीज और तीमारदार

औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद के अजीतमल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अजीतमल परिसर में नगर पंचायत औरैया बाबरपुर–अजीतमल द्वारा मरीजों व तीमारदारों की सुविधा के लिए स्थापित वाटर एटीएम पिछले कई महीनों से बंद पड़ा हुआ है। बढ़ती भीड़ और अस्पताल में आने वाले लोगों की दैनिक जरूरतों के बीच स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता न होना गंभीर समस्या बनकर उभर रही है। मशीन के बंद होने से अस्पताल पहुंचने वाले मरीज, तीमारदार तथा आसपास के स्थानीय नागरिक स्वच्छ पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।

लाखों रुपये की लागत से लगाया गया यह वाटर एटीएम उचित रखरखाव और नियमित निगरानी न मिलने के कारण धीरे-धीरे कबाड़ का रूप लेता जा रहा है। अस्पताल में आने वाले लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर स्वच्छ पानी उपलब्ध होना सबसे प्राथमिक आवश्यकता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें बड़ी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कई बार समाचार पत्रों में मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया, वहीं स्थानीय लोगों ने भी नगर पंचायत प्रशासन से शिकायतें कीं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।

इधर, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अखिलेश चक ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वाटर एटीएम में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी नहीं है। उनके अनुसार, “बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित होने के कारण मशीन बंद हो जाती है। फिर भी, नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टेक्नीशियन को भेजकर समस्या के समाधान का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने आश्वस्त किया कि जल्द ही मशीन को दुरुस्त कर पूर्ण क्षमता के साथ चालू कराया जाएगा।

स्थानीय नागरिक उमेश चन्द्र , आलोक कुमार, उदय , अखिलेश सिंह का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते नियमित आपूर्ति और रखरखाव पर ध्यान दे, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का निर्बाध उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है।

जनहित की दृष्टि से नगर पंचायत प्रशासन को चाहिए कि बिजली–पानी की आपूर्ति को स्थायी रूप से सुनिश्चित करते हुए वाटर एटीएम को जल्द से जल्द शुरू कराए, ताकि मरीजों और उनके तीमारदारों को किसी प्रकार की समस्या न हो। यह केवल स्वास्थ्य सुविधा से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही की परीक्षा का भी समय है।

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