श्री शांतिनाथ भगवान जी की प्राशुक जल से कराई शुद्धि
नगर के श्री 1008 पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर नेहरू रोड पर स्तिथ मंदिर परिसर में आयोजित श्री सिद्ध चक्र महामण्डल विधान के चौथे दिन सबसे पहले सौधर्म इंद्र सतेंद्र जैन ने श्री 1008 शांतिनाथ भगवान जी को पांडुकशीला पर विराजमान किया

बड़ौत। नगर के श्री 1008 पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर नेहरू रोड पर स्तिथ मंदिर परिसर में आयोजित श्री सिद्ध चक्र महामण्डल विधान के चौथे दिन सबसे पहले सौधर्म इंद्र सतेंद्र जैन ने श्री 1008 शांतिनाथ भगवान जी को पांडुकशीला पर विराजमान किया और उसके बाद पंडित नरेश चंद जैन हस्तिनापुर वालो ने पहले मंगलाष्टक का पाठ किया, और चारो कोनो पर 4 कलश की स्थापना कराई । सभी इंद्र इंद्राणियो की प्राशुक जल से शुद्धि कराई और इन्द्रो ने माथे पे तिलक लगाया। फिर प्राशुक जल से सतेंद्र जैन अतुल जैन राजीव जैन विनय जैन अमन जैन ने श्री शांतिनाथ भगवान जी का अभिषेक किया उसके बाद शांतिनाथ भगवान जी की शांति धारा की गई ।उसके तुरंत बाद दैनिक पूजा शरू की गई जिसके अंतर्गत श्री शांतिनाथ ,नंदीश्वर दीप, ,पंचमेरु ,देवशास्त्र गुरु पार्श्वनाथ भगवान,और अन्य पूजा की गई सौधर्म इंद्र और सभी इंद्र इंद्राणियो ने श्री जी की भक्ति और नृत्य किया।। जिसे देखकर सभी जय जयकार करने लगें। वही पण्डित नरेश चंद जैन ने अपने प्रवचन में बताया कि सिद्धचक्र महामण्डल विधान में पूजन करने से दिव्य शक्तियां प्रकट होती है।यह विधान सब विधानों का राजा है।उसके बाद सिद्धचक्र महामण्डल विधान शुरू हुआ जिसमें 64अर्घ मांडले पर मंत्रोच्चारण के साथ समर्पित किये गए । संध्या के समय श्री जी की संगीतमयी आरती की गई जिसमे पंचप्रमेष्टि भगवान ,शांति नाथ भगवान और सिद्धचक्र महामण्डल विधान की आरती की जिसमे बड़ी संख्या में श्रद्धालुयों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सतेंद्र जैन,नरेश चंद जैन,अनिल जैन ,राजीव जैन,अदिश जैन,संजीव जैन मुकेश जैन अमन जैन अमित जैन आदि का भरपूर सहयोग रहा।


