
शामली। कुष्ठ रोग वंशानुगत नहीं, बुरे कर्मों का फल या श्राप भी नहीं है, यह माइको बैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु (बैक्टीरिया) से होता हैं”। यह लाइलाज बीमारी नहीं है, समय रहते इसका उपचार संभव है। यह बात मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय अग्रवाल ने गुरुवार को कही। उन्होंने बताया – जनपद में कुष्ठ रोगी खोज अभियान के तहत सर्वे किया जा रहा है और लोगों को कुष्ठ रोग के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया- 15 फरवरी से 15 मार्च चलने वाले इस अभियान में 3.50 लाख की आबादी का सर्वे किया जाना है, जिसमें कुष्ठ रोगियों की पहचान कर उनका इलाज किया जाना है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय अग्रवाल ने बताया – अभियान के तहत पूरे जिले में 15 मार्च तक कुष्ठ रोगियों को खोजा जायेगा। पिछले तीन वर्षों में जनपद के जिन क्षेत्रों में कुष्ठ रोगी पाये गये हैं, उन्हीं क्षेत्रों में यह अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान जनपद के 104 नगरीय वार्डों तथा 41 ग्राम सभा क्षेत्रों में चलाया जा रहा है इसके लिये विभाग की ओर से 227 टीम गठित की गयीं हैं। प्रत्येक टीम में एक महिला तथा एक पुरुष कार्यकर्ता है। इस अभियान में जिले की लगभग 3.50 लाख आबादी को कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। टीम घर घर जाकर कुष्ठ रोगी खोजेने के प्रयास में जुटी हुई हैं। हालांकि जिले में अभी तक कोई भी नया कुष्ठ रोगी नहीं मिला है लेकिन प्रयास है कि लक्षित आबादी की स्क्रीनिंग करके रोगियों को खोजा जाए और जल्द से जल्द इलाज सुनिश्चित कराया जाए।
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया – कुष्ठ रोग में शरीर की चमड़ी पर हल्के पीले अथवा ताम्बे के रंग का सुन्न दाग या चकते होते हैं, जिसको छूने पर या ठंडे गर्म का पता नही चलता है समय से इलाज से विकृतियों से बचा जा सकता है जनपद में कुल नौ सक्रिय कुष्ठ रोगी हैं। सर्वे में कोई नया कुष्ठ रोगी नहीं मिला है।
कुष्ठ पर्यवेक्षक अशुतोष कुमार शुक्ला ने कहा- “समाज में पहले जानकारी के अभाव में कुष्ठ रोग को लेकर तमाम भ्रांतियां थीं, जो सरकार और स्वास्थ्य विभाग के प्रयास से दूर हो रही हैं। लोगों की समझ में अब आने लगा है कि यह रोग खानदानी, वंशानुगत, आनुवांशिक नहीं है। न ही पूर्व जन्म के कर्मो का फल अथवा किसी के श्राप का परिणाम है। विभाग की ओर से लगातार चलाये जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों तथा प्रचार प्रसार के कारण लोग शरीर के किसी अंग पर दाग धब्बा, चकत्ता और सुन्नपन के बारे में जानकारी होते ही स्वयं अस्पतालों में आने लगे हैं। फिर भी अभी जनमानस को और जागरूक करने की आवश्यकता है।इसी लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं उन्होंने बताया – विभाग की ओर से कुष्ठ से विकलांग व्यक्ति का विकलांग प्रमाण पत्र बनाया जाता हैं। कुष्ठ से विकलांग व्यक्ति को सरकार प्रत्येक माह 3000 रुपये पेंशन भी देती है।




