राजनीति

विदेश से लौटे 7 दलों के प्रतिनिधिमंडल से मिले PM मोदी, कांग्रेस का तंज- क्या अब राजनीतिक दलों को विश्वास में लेंगे प्रधानमंत्री?

कांग्रेस ने विदेश से लौटे बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों के साथ प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तंज कसा है।

कांग्रेस ने विदेश से लौटे बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों के साथ प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तंज कसा है।

कांग्रेस ने विदेश से लौटे बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात का हवाला देते हुए बुधवार को सवाल किया कि क्या अब वह राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ी चुनौतियों पर संसद के मानसून सत्र में चर्चा कराएंगे और राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक बुलाकर उन्हें विश्वास में लेंगे?
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को विदेश से लौटे प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों से मुलाकात की थी। इन प्रतिनिधिमंडलों ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद वैश्विक स्तर पर भारत का पक्ष रखने के लिए विभिन्न देशों का दौरा किया था।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “अब जबकि प्रधानमंत्री स्वयं उन सात संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों से मिल चुके हैं जिन्हें 32 देशों में भेजा गया था, तो क्या वह अब कम से कम सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक बुलाकर उन्हें, चीन और पाकिस्तान के प्रति भारत की भावी रणनीति तथा सिंगापुर में सीडीएस द्वारा किए गए खुलासों के सामरिक निहितार्थों पर विश्वास में लेंगे?”

उन्होंने सवाल किया कि संसद के मानसून सत्र में देश की सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर क्या प्रधानमंत्री पहलगाम हमले के बाद उत्पन्न चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा कराने को तैयार होंगे, विशेषकर जब ‘इंडिया’ गठबंधन की विशेष सत्र की मांग दुर्भाग्यपूर्ण रूप से ठुकरा दी गई है?

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 21 जुलाई को होगी और इसका समापन 12 अगस्त को होना है।

रमेश का कहना है कि क्या सरकार पहलगाम हमले के आतंकवादियों को न्याय के कटघरे में लाने के प्रयास दोगुने करेगी, जिनके बारे में रिपोर्ट है कि वे पहले भी पुंछ (दिसंबर 2023), गगनगीर और गुलमर्ग (2024) के तीन आतंकी हमलों में शामिल थे?

उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि जुलाई, 1999 में गठित कारगिल समीक्षा समिति (जिसकी अध्यक्षता वर्तमान विदेश मंत्री के पिता ने की थी) की तर्ज पर क्या विशेषज्ञों का एक समूह गठित किया जाएगा, जो ऑपरेशन सिंदूर का विस्तार से विश्लेषण करे और भविष्य के युद्धों को लेकर अपनी सिफारिशें दे- जिनमें नए सैन्य प्लेटफॉर्म्स और तकनीक का विकास, संकट की स्थिति में रणनीतिक संचार क्षमताओं का निर्माण आदि शामिल हों?

कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या इस समिति की रिपोर्ट -आवश्यक संशोधनों और गोपनीय अंशों को हटाने के बाद -संसद में प्रस्तुत की जाएगी, ठीक वैसे ही जैसे फरवरी 2000 में कारगिल समीक्षा समिति की रिपोर्ट संसद में रखी गई थी?

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