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लखनऊ नगर निगम जल्द होगा पेपरलैस

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्वाकांक्षी ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के साथ कदमताल मिलाने के संकल्प के साथ लखनऊ नगर निगम ने पेपरलैस प्रणाली को अपनाने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिये हैं।

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्वाकांक्षी ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के साथ कदमताल मिलाने के संकल्प के साथ लखनऊ नगर निगम ने पेपरलैस प्रणाली को अपनाने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिये हैं।
नगर निगम प्रशासन ने बुधवार को सोशल माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ‘कू’ के जरिये यह जानकारी साझा की है जिसके अनुसार जल्द ही नगर निगम पेपरलेस हो जाएगा, यानी अधिकारियों के आदेश निर्देश डिजिटली जारी होंगे, साथ ही साथ फाइलें भी डिजिटल हो जाएँगी और सिविल कार्यों के एस्टीमेट भी डिजिटल बनेंगे। नगर आयुक्त ने इसके लिए प्रयास शुरू किया है।
इसके साथ ही आम लोगों को बुनियादी सुविधाएँ देने के लिए लखनऊ नगर निगम ने एक नई पहल की है, जिसमें नाले-नालियों की नियमित साफ-सफाई, समुचित मार्ग व्यवस्था, हरियाली और पार्क का विकास और अनुरक्षण, मार्ग प्रकाश, पेयजल की व्यवस्था कराना शामिल है। इसके लिये 31 मई से दो जून के बीच शहर में तीन दिवसीय विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
नगर निगम ने आज दो कूज़ किये जिनमें पहले में कहा गया है “ डिजिटल इंडिया के तहत लखनऊ नगर निगम एक नई पहल की शुरुआत करने जा रहा है। नगर निगम द्वारा समस्त विभागीय कार्यों को डिजिटलाइज किये जाने की रणनीति तैयार कर ली गयी है।”
एक अन्य पोस्ट के माध्यम से कहा गया है “ राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री द्वारा थर्ड जीबीसी (ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी) पर लखनऊ आगमन के दृष्टिगत नगर को स्वच्छ बनाने व व्यवस्थित करने के उद्देश्य से 31 मई से दो जून के बीच तीन दिवसीय विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। ”
अधिकृत सूत्रों ने बताया कि लखनऊ नगर निगम अपने प्रोजेक्ट और फाइलिंग सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए एफएपीएमएस सॉफ्टवेयर सिस्टम से काम करने जा रहा है। इस कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर प्रणाली से नगर निगम अपनी प्रोजेक्ट फाइल को ऑटोमेट और व्यवस्थित करेगा। सिविल कार्यों के एस्टीमेट भी स्वत: जनरेट हो जाएँगे।
उन्होने बताया कि अगर किसी सीसी रोड का निर्माण होना है, तो सिर्फ रोड की लंबाई और चौड़ाई का विवरण देने पर ही सॉफ्टवेयर में पहले से मौजूद संबंधित मानक दरों के आधार पर सीसी मार्ग का पूरा एस्टीमेट तैयार कर देगा। सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोजेक्ट फाइल के सृजन से लेकर भुगतान तक पारदर्शी व्यवस्था बनेगी। इससे न केवल निगम का कार्य सही ढंग से होगा, बल्कि निगम के धन का बेहतर उपयोग तथा कार्यों का समयबद्ध निस्तारण होगा।

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