देश-विदेश

रूस से तेल खरीदने की अमेरिकी मंजूरी: कच्चे तेल की कीमतों को काबू में करने की कवायद

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। कच्चे तेल की कीमतें सौ डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अन्य देशों को रूस से तेल खरीदने की अस्थायी मंजूरी दे दी है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी नए लाइसेंस के अनुसार उन रूसी पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री और डिलीवरी की जा सकेगी जो बारह मार्च की मध्यरात्रि से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे।

तीस दिन की अस्थायी राहत अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल ग्यारह अप्रैल तक यानी तीस दिनों के लिए मान्य होगी। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाना है ताकि आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाई जा सके। प्रशासन का मानना है कि इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा क्योंकि यह छूट केवल उस तेल के लिए है जो पहले से ही रास्ते में है।

कीमतों में उछाल की मुख्य वजहें विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला ईरान के साथ युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली बीस प्रतिशत तेल सप्लाई का ठप होना है। दूसरा मिडिल ईस्ट के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हालिया हमले हैं। तीसरा सबसे बड़ा डर ईरान की वह चेतावनी है जिसमें उसने कच्चे तेल के दाम दो सौ डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई है। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड एक सौ बीस डॉलर के करीब पहुंच गया था जो अब एक सौ एक डॉलर के आसपास बना हुआ है।

भारत का रुख और पुराने प्रतिबंध उल्लेखनीय है कि वर्ष दो हजार बाईस में यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने रूसी तेल पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी अन्य देश की अनुमति पर निर्भर नहीं है। भारत अपनी जरूरत का आधा तेल उसी समुद्री मार्ग से मंगाता है जो वर्तमान में युद्ध की वजह से प्रभावित है।

आपातकालीन भंडार का उपयोग बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए अमेरिका अपने स्ट्रैटजिक रिजर्व यानी आपातकालीन भंडार से रिकॉर्ड मात्रा में तेल निकालने की तैयारी कर रहा है। इसके बावजूद सप्लाई चेन टूटने का डर निवेशकों और बाजारों पर हावी दिख रहा है। अमेरिकी सरकार का यह ताजा कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी और महंगाई के झटके से बचाने की एक कोशिश माना जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button