योगी के गढ़ में हिंदुत्व की लहर, जातीय समीकरणों के सहारे गठबंधन
2024 के लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण की सबसे हॉट सीटों में शुमार है उत्तर प्रदेश का गोरखपुर। स्वतंत्रता संग्राम हो या फिर साहित्य की बात या फिर धर्म और राजनीति का मामला, गोरखपुर को नजरअंदाज करना मुमकिन नहीं।

2024 के लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण की सबसे हॉट सीटों में शुमार है उत्तर प्रदेश का गोरखपुर। स्वतंत्रता संग्राम हो या फिर साहित्य की बात या फिर धर्म और राजनीति का मामला, गोरखपुर को नजरअंदाज करना मुमकिन नहीं। यहीं नाथ पीठ का गोरखनाथ मंदिर है, जो वर्तमान में पूर्वांचल ही नहीं पूरे प्रदेश की राजनीति की धुरी साबित हो रहा है। यहीं पर गीताप्रेस गोरखपुर भी है, जिसने घर-घर गीता, वेद-पुराण को पहुंचाने में भूमिका निभाई है। रामप्रसाद बिस्मिल जैसे आजादी के दीवाने रहे हों या फिर प्रसिद्ध कथाकार प्रेमचंद हों या शायर फिराक गोरखपुरी, उनका भी नाता गोरखपुर से रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान चौरीचौरा कांड भी यहीं हुआ था।
25 वर्षीय राहुल कहते हैं कि बाबा के सीएम बनने के बाद से गोरखपुर का नक्शा ही बदल गया है। रामगढ़ ताल तो गोरखपुर का गोवा साबित हो रहा है। ताल में क्रूज चलते हैं और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट भी। यहां गोरखपुर के बाहर से लोग भी घूमने आते हैं।

1989 से इस सीट पर भगवा लहर चल रही है। 1984 तक हुए पिछले 8 चुनावों में 6 बार यहां कांग्रेस का पंजा चला। बीच में एक बार 1967 में गोरक्षपीठ के तत्कालीन महंत दिग्विजयनाथ ने यह सीट जीती थी तो 1977 में आपातकाल को लेकर कांग्रेस के खिलाफ जनता में गुस्से के कारण जनता पार्टी प्रत्याशी हरिकेश बहादुर जीतने में सफल रहे थे। 1984 से इस सीट पर जीत के लिए कांग्रेस तरसती रही है। 1989 से लेकर 1996 तक गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ यहां से सांसद रहे। 1989 का चुनाव महंत अवेद्यनाथ ने हिंदू महासभा के बैनर तले लड़ा था। 1998 से लेकर 2014 तक लगातार पांच बार योगी आदित्यनाथ इस सीट से चुनाव जीते।

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रवि किशन ने सपा प्रत्याशी राम भुआल निषाद को तीन लाख से अधिक वोटों से हराया था। रविकिशन को कुल पड़े मतों का 60.54 प्रतिशत यानी 717,122 वोट मिले थे, जबकि रामभुआल निषाद को 4,15,458 वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी मधुसूदन त्रिपाठी 22,972 वोट पाकर तीसरे स्थन पर थे। जबकि 2018 के उपचुनाव में प्रवीण कुमार निषाद 456,589 वोट पाकर जीते थे, उन्होने भाजपा के उपेंद्र शुक्ल को हराया था। उपेंद्र शुक्ल को 4,34,783 वोट मिले थे। 2014 के चुनाव में योगी आदित्यनाथ को 5,39,127 वोट मिले थे और उन्होंने सपा के रामजीत निषाद को 3 लाख से अधिक वोटों से हराया था।



