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युगल कवि अशोक गोयल बीना गोयल का जन्म दिवस व सष्टि पूर्ति उत्सव फूड वैली होटल में कवियों ने महा उत्सव के रूप में मनाया

जनपद हापुड़ मे हिंदी साहित्य भारती ,राष्ट्रीय कवि संगम व भारत माता अभिनंदन संगठन के संयुक्त तत्वाधान में कवियों ने पिलखुवा के वरिष्ठ कवि अशोक गोयल एवं कवयित्री बीना गोयल का 60वा जन्म दिवस महा उत्सव के रूप में पिलखुवा के फूड वैली होटल में मनाया

हापुड़। जनपद हापुड़ मे हिंदी साहित्य भारती ,राष्ट्रीय कवि संगम व भारत माता अभिनंदन संगठन के संयुक्त तत्वाधान में कवियों ने पिलखुवा के वरिष्ठ कवि अशोक गोयल एवं कवयित्री बीना गोयल का 60वा जन्म दिवस महा उत्सव के रूप में पिलखुवा के फूड वैली होटल में मनाया ।कार्यक्रम में दूर दूर के कवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई व युगल कवि को अपने काव्यमय प्रस्तुति से बधाई एवम् शुभकामनाएं दी ।कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध कवि डा. वागीश दिनकर ने अपनी ओज की कविता के माध्यम से कहा कि.राष्ट्रसूर्य पर जब संकट के घन छाते है देववृति पर जब वृत्रासुर मंडराते है डॉ.अशोक मैत्रय ने पढा.मैं तूफान के रूख को मोड़ सकता हूँ रिश्तों के टूटे धागों को मैं जोड़ सकता हूँ।राज चैतन्य जी हिंदी के सम्मान में बोले… जन जन के दिल में हो साकार हिंदी का तो वहीं।वरिष्ठ कवि अशोक गोयल जी ने कवियों के सम्मान में कहा कि.चित्त चितवन की मधुरिम में यादें, खास गजल हो जाती है।
और आप से नेह मिलन की, याद गजल हो जाती है।कवि दिनेश त्यागी ने कुछ यूँ पढा…. हिंदी का डंका बजे, चहूँ दीप फैले हर्ष ऐसा पर्व मनाइये।कवयित्री बीना गोयलने पढ़ा_जन्मदिन पर हम सभी मिले हैंदेखो खुशियों के गुल खिले हैं।कवि अटल मुरादाबादी ने कहा कि.. दिलों की हर इबादत पर मैं हिन्दूस्तान लिख दूंगा।कवि राजकुमार हिन्दुस्तानी ने पढ़ा झुकना न सीखा कभी रुकना न सीखा कभी केसरी है केसरी तो बढ़ता ही जाएगा।कवि प्रेम सागर प्रेम ने पढ़ा रास रचाया श्याम ने, निर्मल बहत समीर।मन वृंदावन हो गया, तन यमुना का तीर।बेखौफ शायर डॉ. नरेश सागर ने रिश्तों पर कुछ यूँ तंज कसा कि….. चलो सच बोलते है, ये रिश्तें तौलते हैजरा नजदीक से देखें, ये कैसे बोलते है।वही मोहित शौर्य ने पिता के लिए पढा…. कितना मुश्किल है जमाने में एक पिता होना।ओमपाल सिंह विकट ने पढ़ा श्राद्ध पक्ष में कौओं ने बैठक की आपात।कवि धर्मेन्द्र काव्य ने पढ़ा जिस पथ से भटक गए वो।कवि डी पी सिंह ने पढ़ा हम सनातनी बलिदानों की परंपरा के वाहक हैं।कार्यक्रम में उपरोक्त के अतिरिक्त कवयित्री कल्पना कौशिक, डॉ सतीश वर्धन ,रामवीर आकाश , कवि विजय वत्स,कवि कविआशीष भारतद्वाज,कवयित्री स्नेहलता भारती,गरिमा त्यागी ,कवि रामासरे गोयल, महेश वर्मा, अनिल अग्रवाल जी ,आंचल अग्रवाल , प्रिंस,कवि प्रशांत,शिव प्रकाश शर्मा, दिव्यहंस दीपक , पुष्पेंद्र पंकज, सौरभ राणा, मनीषा गुप्ता, गजलकार राजीव सिंहल, डॉ संजीव शर्मा ,आदि सभी ने काव्य पाठ किया कार्यक्रम में दर्जनों बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।मंच का शानदार मंच संचालन संस्था के जिला अधयक्ष कवि दिनेश त्यागी और कवि मोहित शौर्य ने संयुक्त रूप से किया।कार्यक्रम लगभग 6घंटे अनवरत चला कार्यक्रम में पधारे सभी रचनाकारों व अतिथियों का स्वागत साधना अग्रवाल,हरीश अग्रवाल,अंकित गोयल ,आंचल अग्रवाल ,अंकित अग्रवाल ,डोली गोयल ने किया।

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