मुजफ्फरनगर: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने तोड़ी किसानों की कमर, सरसों और गेहूं की फसलें तबाह

मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और आसपास के जनपदों में रविवार को मौसम ने अचानक करवट ली। तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने जहाँ आम जनजीवन को प्रभावित किया, वहीं अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। अचानक आए इस प्राकृतिक बदलाव से तैयार खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है।

फसलों पर प्रकृति की मार

मौसम विभाग और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस ओलावृष्टि का सबसे बुरा असर सरसों, गेहूं और आम की बागवानी पर पड़ा है।
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सरसों: सरसों की फसल कटाई के करीब थी, लेकिन ओले गिरने से फलियाँ टूटकर जमीन पर गिर गईं, जिससे पैदावार में भारी गिरावट की आशंका है।
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गेहूं: तेज हवाओं और ओलों के कारण कई क्षेत्रों में गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है। दानों में नमी आने से उनकी गुणवत्ता और वजन दोनों प्रभावित होने का खतरा है।
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आम के बाग: आम के पेड़ों पर आए बौर (फूल) और छोटे फल ओलों की चोट नहीं सह सके और झड़ गए। बागवानों का कहना है कि इस साल आम की बंपर पैदावार की उम्मीद थी, जो अब धूल में मिल गई है।
तापमान में भारी गिरावट और सुधरी हवा
बारिश और ओलावृष्टि के बाद मुजफ्फरनगर का न्यूनतम तापमान गिरकर 18°C पर आ गया है। 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली ठंडी हवाओं ने मार्च के महीने में फिर से हल्की ठंड का अहसास करा दिया है। हालांकि, किसानों के लिए यह बारिश दुख लेकर आई, लेकिन पर्यावरण के लिहाज से इसका सकारात्मक असर भी दिखा। बारिश के कारण वातावरण में मौजूद धूल के कण बैठ गए, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सुधरकर 59 पर दर्ज किया गया, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है।
प्रशासनिक सतर्कता और मुआवजा
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओलावृष्टि से हुए नुकसान का संज्ञान लेते हुए सभी जिलाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से क्षेत्रों का दौरा करने और फसल क्षति का आकलन (सर्वे) करने के निर्देश दिए हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों की फसलों को क्षति पहुँची है, उन्हें नियमानुसार समय पर मुआवजा वितरित किया जाएगा।
किसानों की पुकार
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि शनिवार रात से ही बादल छाए हुए थे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि ओले गिरेंगे। कई खेतों में जलभराव हो गया है, जिससे दलहन की फसलों को भी खतरा है। किसान अब सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं ताकि उन्हें इस भारी आर्थिक नुकसान से उबरने में मदद मिल सके।



