मुजफ्फरनगर: परीक्षा से ठीक पहले श्रमिक पंजीकरण निरस्त, मजदूरों का श्रम कार्यालय पर जोरदार हंगामा

मुजफ्फरनगर। जनपद के श्रम विभाग कार्यालय पर रविवार को होने वाली ‘अटल आवासीय विद्यालय’ की प्रवेश परीक्षा से ठीक पहले भारी हंगामा खड़ा हो गया। विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से आए दर्जनों पंजीकृत श्रमिकों ने विभाग पर तानाशाही और मनमानी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। श्रमिकों का गुस्सा इस बात पर है कि परीक्षा से ऐन वक्त पहले न केवल उनके बच्चों के प्रवेश पत्र (Admit Card) रोक दिए गए, बल्कि उनके वर्षों पुराने श्रमिक कार्डों को भी अवैध बताकर निरस्त कर दिया गया।
सालों पुराने पंजीकरण पर उठा सवाल प्रदर्शनकारी मजदूरों का कहना है कि वे नियम अनुसार अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवेदन कर चुके थे। रविवार को परीक्षा होनी है, लेकिन विभाग अब उन्हें ‘श्रमिक’ मानने से ही इनकार कर रहा है।

-
मोहम्मद इरशाद (श्रमिक): “पिछले साल इसी पंजीकरण के आधार पर मेरे बेटे ने परीक्षा दी थी, तब मैं पात्र था। इस बार बेटी के आवेदन पर मुझे अपात्र बताकर कार्ड ही निरस्त कर दिया गया। विभाग की यह दोहरी नीति समझ से परे है।”

-
कविता (महिला श्रमिक): “मैं 2018 से विभाग में पंजीकृत हूं और सभी शर्तों का पालन कर रही हूं। गांव में अन्य लोगों के प्रवेश पत्र जारी कर दिए गए, लेकिन हमें अंतिम समय पर तनाव में डाल दिया गया है।”
प्रवेश पत्र न मिलने से बच्चों का भविष्य अधर में श्रमिकों ने आरोप लगाया कि विभाग ने जांच के नाम पर बिना किसी पूर्व सूचना के उनके पंजीकरण रद्द किए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि वे पात्र नहीं थे, तो विभाग ने इतने वर्षों तक उनका पंजीकरण क्यों जारी रखा और पिछले आवेदनों को कैसे स्वीकार किया गया?
अधिकारी का पक्ष इस पूरे मामले पर अटल आवासीय विद्यालय की प्रधानाचार्या ज्योति मखीजा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि इस विद्यालय में प्रवेश के कड़े नियम हैं और यह केवल ‘निर्माण श्रमिकों’ (Construction Workers) के बच्चों के लिए आरक्षित है। उन्होंने कहा कि आवेदन के बाद श्रम विभाग द्वारा गहन जांच की जाती है। इस जांच के दौरान जो लोग निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते या अपात्र पाए जाते हैं, उनके पंजीकरण और आवेदन निरस्त कर दिए जाते हैं।
परीक्षा से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने अभिभावकों और छात्रों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। पीड़ित श्रमिकों ने जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप कर बच्चों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की मांग की है।



