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मुजफ्फरनगर के मरीज को घुटनों के दर्द से मिला छुटकारा, हुई सफल रिप्लेसमेंट सर्जरी

मुजफ्फरनगर : घुटने के दर्द से जुड़े इलाज के लिए अब नए नए एडवांस तरीके आ गए हैं जिनके चलते नी रिप्लेसमेंट जैसी प्रक्रिया मरीजों के लिए गेम चेंजर साबित हो रही हैं. खासकर, उन लोगों को एडवांस रिप्लेसमेंट तकनीक से ज्यादा लाभ पहुंचा है। जिन्हें घुटने के जोड़ों में गंभीर ऑस्टियो अर्थराइटिस की शिकायत रहती है. इसी के मद्देनजर लोगों को अवेयर करने और टाइम पर सही इलाज कराने के मकसद से मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल वैशाली, गाजियाबाद ने आज शहर में एक जागरूकता सत्र आयोजित किया.

इस मौके पर मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल वैशाली में ऑर्थोपिडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर निकुंज अग्रवाल मौजूद रहे. साथ ही 68 वर्षीय मरीज दर्शना अरोड़ा भी यहां मौजूद रहीं, जिनका नी- अर्थराइटिस का सफलतापूर्वक इलाज किया गया.

68 वर्षीय महिला मरीज दर्शना अरोड़ा गंभीर घुटने के दर्द से पीड़ित थीं, उनके दोनों घुटने के जोड़ों में परेशानी थी. हालात इतने चिंताजनक थे कि वो थोड़ी सी दूरी चल पाने में भी सक्षम नहीं थीं और रोजमर्रा के काम भी नहीं कर पा रही थीं, उन्होंने सभी तरह के परंपरागत इलाज कराए, दवाई खाई लेकिन कहीं से कोई राहत नहीं मिली. इसके बाद वो मैक्स हॉस्पिटल वैशाली पहुंची उन्हें बहुत ही ज्यादा दर्द था और घुटने मोड़ पाने में भी काफी दिक्कत हो रही थी. मरीज की गहन जांच-पड़ताल की गई, एक्स-रे कराया गया. जांच में पता चला कि उन्हें दोनों घुटनों में गंभीर ऑस्टियो अर्थराइटिस है. मरीज को नी रिप्लेसमेंट के फायदे बताए गए. इस तरह के मामलों में टोटल नी रिप्लेसमेंट ही सबसे बेहतर व अंतिम उपाय बचता है. महिला मरीज को बात समझ आई और वो इसके लिए तैयार हो गईं.

डॉक्टर निकुंज अग्रवाल ने इस केस के बारे में आगे बताया, “मरीज को सर्जरी से एक दिन पहले अस्पताल में भर्ती किया गया. इसके बाद सेम सिटिंग में ही मॉडर्न तकनीक के जरिए कंप्यूटर नेविगेटेड मिनिमली इनवेसिव बाइलेटरल टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की गई. सर्जरी सफल रही और अगले ही दिन से मरीज ने आराम से चलना स्टार्ट कर दिया. सर्जरी के दो हफ्तों के अंदर महिला बिना किसी की मदद और स्टिक के ही खुद से चलने-फिरने लगी.”

मैक्स अस्पताल वैशाली में ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर निकुंज अग्रवाल ने आगे बताया, “टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्र में हुई तरक्की मरीजों के लिए वरदान बन गई है, खासकर उन मरीजों के लिए जिनका घुटने के अर्थराइटिस की वजह से चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है. आमतौर पर इस तरह की दिक्कतें मरीज की लापरवाही से ही होती है. शुरुआत में जोड़ों का दर्द ज्यादा दिक्कत नहीं देता है लेकिन गुजरते वक्त के साथ कंडीशन बिगड़ती जाती है और दर्द भी गंभीर होता रहता है. जब ऐसे हालात आ जाते हैं तब ही मरीज डॉक्टर की तरफ रुख करते हैं. हाल के वक्त में नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्र में जो एडवांसमेंट हुए हैं उनके रिजल्ट बहुत अच्छे आ रहे हैं. आर्थोप्लास्टी एक बहुत ही शानदार तकनीक से किया जाने वाला इलाज है, जिसके रिजल्ट 99.9% तक आते हैं और इंप्लांट जोड़ों की उम्र व फंक्शनिंग काफी बेहतर रहती है. इस प्रक्रिया से मरीजों को स्टेबल “दर्द रहित और अच्छे से फंक्शन करने वाले जॉइंट तो मिलते ही हैं, साथ ही उनकी जिंदगी में भी सकारात्मक सुधार आता है. इस सत्र के माध्यम से मैं ये बताना चाहता हूं कि समय पर रोग की स्क्रीनिंग कराई जाए, ताकि वक्त पर बीमारी का पता चल सके. खासकर, 55 साल की उम्र के बाद ऐसी किसी भी समस्या को अनदेखा न करें ”

नी- रिप्लेसमेंट की ये मिनिमली इनवेसिव तकनीक इलाज को काफी सुगम और सुरक्षित बनाती हैं. मरीज को अस्पताल में कम वक्त रुकना पड़ता है और रिकवरी भी बहुत तेजी से होती है. इसके अलावा मरीज को पूरे तरह से संतुष्टि मिलती है. पिछले वर्षों में इस तरह की समस्याओं से पीड़ित काफी मरीजों की मैक्स हॉस्पिटल वैशाली में सफल जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की गई है।

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