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मुंबई के जेजे अस्पताल में वीआईपी मरीजों की भीड़

मुंबई के सरकारी जेजे अस्पताल में हाल ही में विशिष्ट लागों, खास कर विभिन्न मामलों में गिरफ्तार लोगों की भीड़ देखी जा रही है। इस अस्पताल में आम तौर पर मुफ्त इलाज का लाभ उठाने वाले लोगों की भीड़ रहती है। अस्पताल की क्षमता चार हजार से अधिक बिस्तरों की है और यहां हमेशा मरीजों एवं उनके परिजनों की भीड़ होती है।

मुंबई। मुंबई के सरकारी जेजे अस्पताल में हाल ही में विशिष्ट लागों, खास कर विभिन्न मामलों में गिरफ्तार लोगों की भीड़ देखी जा रही है। इस अस्पताल में आम तौर पर मुफ्त इलाज का लाभ उठाने वाले लोगों की भीड़ रहती है। अस्पताल की क्षमता चार हजार से अधिक बिस्तरों की है और यहां हमेशा मरीजों एवं उनके परिजनों की भीड़ होती है। हालांकि, सरकार द्वारा संचालित इस अस्पताल पर गिरफ्तार अभियुक्तों की जांच और उपचार की भी जिम्मेदारी है। इनमें छोटे अपराधियों से लेकर पूर्व मंत्री तक शामिल हैं।

समस्या तब और भी बदतर हो जाती है जब विशिष्ट आरोपियों को लेकर आने की सूचना पुलिस समय से अस्पताल को नहीं देती है, जिससे सुरक्षा कारणों से दैनिक कार्य प्रभावित होते हैं। जे जे अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया, ‘‘पिछले कुछ महीनों में पूर्व मंत्रियों अनिल देशमुख, नवाब मलिक और शिवसेना नेता संजय राऊत जैसे हाई प्रोफाइल मरीज जांच के लिये यहां लाए गए हैं, इन नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों ने गिरफ्तार किया है।

ये मरीज भारी सुरक्षा व्यवस्था के साथ अस्पताल में आते हैं जिससे यहां दैनिक काम काज प्रभावित होता है जहां अकसर भीड़ रहती है।’’ उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है , जिसका मतलब है कि इन चिकित्सा कर्मियों को वीआईपी मरीजों की सामान्य जांच करने में भी अधिक समय खर्च करना पड़ता है, जबकि इस समय में वे उन आम मरीजों का इलाज कर सकते थे, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के होते हैं। हालांकि, जेजे अस्पताल की डीन डॉ पल्लवी सपले कहती हैं, ‘‘कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोत्तरी करने का एक प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा गया है।

इसके अलावा खाली पदों पर भर्ती करने और ऐसे मामलों की जांच करने के लिये चिकित्सा पदाधिकारियों की नियुक्ति करना भी शामिल है। एक बार हमें इसकी मंजूरी मिल जाती है, तो हमें नये कर्मचारी मिलेंगे और ऐसी चुनौतियों का सामना हम बेहतर तरीके से कर सकेंगे। पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, ऐसी व्यवस्था है कि गिरफ्तार व्यक्ति की चिकित्सीय जांच के लिये सरकारी अस्पताल में ले जाना जरूरी होता है और ऐसे अस्पतालों की रिपोर्ट की उच्चतम कानूनी मान्यता है।

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