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मिल का पत्थर साबित हुई,तीसरी कांतिदेवी जैन स्मृति व्याख्यानमाला

आयरलैंड के उपप्रधानमंत्री ने दिया प्रभावशाली वक्तव्य

नई दिल्ली।विश्व के अनेक देशो के बुद्धिजीवियों के तीन दिन चले वक्तव्य के साथ ही तृतीय श्रीमती कांतिदेवी जैन स्मृति त्रिदिवसीय व्याख्यानमाला का समापन हो गया।समापन समारोह के मुख्य अतिथि के तौर पर आयरलैंड गणराज्य के उपप्रधानमंत्री लियो वराडकर ने इस व्याख्यानमाला मेें भाग लेकर अपना प्रभावशाली वक्तव्य दिया। उपप्रधानमंत्री यो वराडकर ने श्रीमती कांतिदेवी जैन को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि उनकी स्मृति में प्रति वर्ष इस तरह की विश्वस्तरीय व्याख्यानमाला आयोजित करने के लिए उनका परिवार बधाई का पात्र हैं। उपप्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पिता डॉ अशोक वराडकर महाराष्ट्र के मुम्बई के निवासी है। माँ आयरिश मूल की है। मैं कई बार अपने परिवार के साथ मुम्बई आकर रहा हूँ। उन्होंने कहा कि वे 2017 से 2020 तक आयरलैंड के प्रधानमंत्री रहे हैं। अब गठबंधन सरकार के कारण उपप्रधानमंत्री है और कुछ माह बाद पुन: प्रधानमंत्री बन जायेगे।
श्री लियो ने अपने देश में चुनाव संबधी जानकारी देते हुए बताया कि आयरलैंड में भी राष्ट्रपति का चुनाव इंग्लैंड व यूएस की तरह से होता है। यहां के उच्च सदन को ओरेचटास कहा जाता है। जिसमें वोटिंग के लिए आयरिश नागरिक होना जरूरी है। निचले सदन नगरपालिका आदि में आयरलैंड में 6 साल से स्थाई निवास करने वाला कोई भी नागरिक वोट दे सकता है। उन्होंने कहा कि आयरलैंड 20 साल में बहुत बदला है।हमारा देश बहुत मजबूत है। भारत से भी आयरलैंड के मित्रवत संबंध है।उन्होंने कहा कि आयरलैंड में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय आये थे जब मैं प्रधानमंत्री था। लियो ने यह भी बताया कि आयरलैंड में समय का सदुपयोग किस प्रकार किया जाता है।

समारोह के अध्यक्ष प्रोफेसर चक्रधर त्रिपाठी,कुलपति उड़ीसा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने कहा कि चाणक्य वार्ता के इस कार्यक्रम से देश-विदेश के प्रतिनिधि जुड़े हुए हैं। इस व्याख्यान के आयोजन से भारतीय गौरव बढ़ा है। इसके लिए मैं आयोजकों को साधुवाद देता हूँ। उन्होंने कहा कि भारत के प्रवासी लोगों ने विदेशों में रहकर भारत का मान बढ़ाया है। श्री त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय लोग जहां भी रहते हैं वे अपनी प्रतिभा के बल पर प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं।यही कारण है कि विश्व के अनेक देशो में हमारे नागरिक राजनीतिक क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभा रहे है।
अतिविशिष्ट अतिथि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश कुमार पांडेय ने कहा कि आज की परिस्थिति में भारतीय प्रवासी या अप्रवासी भारत का नागरिक है उनके वंशजो का दायित्व है कि वे उनकी भागीदारी चुनाव में कराये। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है। वहीं भारत में लोकतंत्र इतना मजबूत है कि हम सीना फुलाकर बोल सकते हैं कि भारत प्रजातांत्रिक देश है। चुनाव आयोग को प्रवासी भारतीयों के वोट प्रतिशत को बढ़ाना चाहिए। कुलपति ने इस त्रिदिवसीय कांतिदेवी अंतरराष्ट्रीय व्याख्यानमाला की खुले दिल से प्रशंसा की।
तीसरे दिन की व्याख्यानमाला में बोलते हुए अमेजन( यूरोप) के सीनियर लॉजिस्टिक मैनेजर मनीष पांडे,लक्जमबर्ग ने कहा कि हमारा देश बहुत छोटा है जो गोवा से भी छोटा है। यहां संवैधानिक व्यवस्थाओं के तहत एक राजा होता है लेकिन काम जनता से चुनी गई सरकार करती है। यहां चुनाव में वोट डालना अनिवार्य है, नहीं तो जुर्माना होता है। फिर भी वोट प्रतिशत 35 % तक ही रहता है।यहां के प्रधानमंत्री का देश की जनता बहुत सम्मान करती है। इस देश में केवल 3500 भारतीय मूल के लोग ही रह रहे है।
ऑयल,गैस व ऊर्जा विशेषज्ञ श्रीमती शार्दूला नोगजा सिंगापुर ने लिस्बन की पूरी चुनावी प्रक्रिया को सरल ढंग से समझाया।उन्होंने यह भी बताया कि पूरे देश का एक ही लक्ष्य है कि वह निरंतर आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि सिंगापुर 1965 में आज़ाद हुआ तभी से यहां एक पार्टी की ही सरकार सत्तारूढ है। यहां की सरकार एक फायदेमंद कंपनी की तरह से कार्य करती हैं। बजट भी घाटे का नहीं होता है। चुनाव में 96 प्रतिशत वोटिंग होती है। भारतीय मूल के 20 प्रतिशत नेताओं की यहां की संसद में सक्रिय भागीदारी है। अच्छे राजनीतिक पदों पर भी भारतीय लोग कार्यरत है।
पुर्तगाल में प्रोफेसर शिवकुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत व पुर्तगाल के बीच अच्छे राजनीतिक संबंध है। 1975 से आज तक भारतीय मूल के लोगों का इस देश पर बड़ा प्रभाव है। भारतीय मूल के तीन मंत्री वित्त, योजना व चिकित्सा जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यहां मतदान प्रतिशत ज्यादा नही होता।
टोरंटो विश्वविद्यालय, कनाडा की प्रोफेसर डॉ. हंसादीप ने तीनो दिन के व्याख्यानों की कड़ियों को बहुत सुंदर तरीके से पिरोते हुए अपना प्रभावशाली वक्तव्य दिया।उन्होने प्रवासी भारतीयों को वोटिंग का अधिकार मिलने की वकालत करते हुए कहा कि यह त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय व्याख्यानमाला इस कार्य के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
स्वागत भाषण बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रोफेसर डॉ कौशल त्रिपाठी ने दिया।श्रीमती कांतिदेवी जैन मैमोरियल ट्रस्ट,चाणक्य वार्ता,हंसराज कालेज एवं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस अन्तरराष्ट्रीय कार्यक्रम का संचालन धर्मपाल महेंद्र जैन कनाडा द्वारा किया गया।सर्वप्रथम श्रीमती कांतिदेवी जैन की स्मृति में वर्ष 2021 में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय व्याख्यानमाला की डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण हुआ।तत्पश्चात चाणक्य वार्ता के संपादक डॉ अमित जैन ने विषय प्रवर्तन करते हुए सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष इसी प्रकार की व्याख्यानमालाओं का आयोजन किया जायेगा जिससे विश्वभर के भारतीय लोग एक मंच पर आये।
विश्व प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना एवं इंटरनेशनल दिव्य परिवार सोसाइटी की सलाहकार शुभदा वराडकर, मुम्बई ने त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय व्याख्यानमाला के समापन अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन किया।इस अवसर पर देश-विदेश के 4000 से अधिक श्रोताओ ने इस व्याख्यानमाला में भाग लेकर गर्व का अनुभव किया।इस अवसर पर विशेष रूप से प्रोफेसर अवनीश कुमार,आरपी तोमर,डाॅ भरत कुमार, हेमंत उपाध्याय,दीपक कुमार जैन, अंकुर जैन, डाॅ अनिता पंडा, डाॅ आलोक सिंह, डाॅ शिशिर जैन, डाॅ प्रभांशु ओज्ञा, टीपी त्रिपाठी,गौरव,दीक्षा कंबोज आदि उपस्थित रहे।

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